सुकमा के कस्तूरी गांव में पट्टा भूमि पर वृक्षारोपण को लेकर विवाद, ग्रामीणों ने वन विभाग से काम रोकने की मांग की

सुकमा जिले के गंजेनार ग्राम पंचायत के वन ग्राम कस्तूरी में वन अधिकार पट्टा भूमि पर वन विभाग द्वारा कराए जा रहे वृक्षारोपण को लेकर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि शासन से वन अधिकार पट्टा मिलने के बावजूद उनकी जमीन पर पौधारोपण कराया जा रहा है, जिससे खेती प्रभावित हो रही है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरीश कवासी के नेतृत्व में ग्रामीण वन मंडल कार्यालय पहुंचे और डीएफओ के नाम ज्ञापन सौंपकर वृक्षारोपण रोकने तथा खेती का अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की।

Sep 3, 2026 - 15:38
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सुकमा के कस्तूरी गांव में पट्टा भूमि पर वृक्षारोपण को लेकर विवाद, ग्रामीणों ने वन विभाग से काम रोकने की मांग की

UNITED NEWS OF ASIA. रिजेन्ट गिरी, सुकमा l जिले में आदिवासियों की वन अधिकार पट्टा भूमि पर वन विभाग द्वारा कराए जा रहे वृक्षारोपण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। गंजेनार ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले वन ग्राम कस्तूरी के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जिन जमीनों पर वे लंबे समय से काबिज हैं और जिन्हें शासन की ओर से वन अधिकार कानून के तहत पट्टा प्रदान किया गया है, उन्हीं भूमि पर वन विभाग द्वारा वृक्षारोपण कराया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे उन्हें अपनी पट्टे वाली जमीन पर खेती करने में परेशानी हो रही है और उनकी आजीविका प्रभावित होने की स्थिति बन रही है।

मामले को लेकर ग्रामीण कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरीश कवासी के नेतृत्व में वन मंडल कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने अपनी शिकायत और मांगों को लेकर डीएफओ के नाम ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया शुरू की। ग्रामीणों का कहना है कि वन अधिकार पट्टा मिलने के बाद संबंधित भूमि पर उनका खेती का अधिकार है, ऐसे में वहां बिना उनकी सहमति के वृक्षारोपण कराया जाना उनके अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने प्रशासन और वन विभाग से मामले की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

ग्रामीणों के अनुसार, कस्तूरी गांव में जिन भूमि पर वृक्षारोपण कराया जा रहा है, उन पर पट्टाधारी परिवार खेती कर अपनी आजीविका चलाते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पौधारोपण के कारण उनके लिए खेती करना मुश्किल हो रहा है। उनका कहना है कि यदि पट्टा भूमि पर वृक्षारोपण जारी रहता है तो आने वाले समय में उनकी कृषि गतिविधियां और आजीविका दोनों प्रभावित हो सकती हैं। इसी वजह से ग्रामीणों ने तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

वन मंडल कार्यालय पहुंचने के दौरान डीएफओ के कार्यालय में मौजूद नहीं होने की स्थिति में हरीश कवासी ने उनसे फोन पर चर्चा की। उन्होंने ग्रामीणों की समस्या और पट्टा भूमि पर चल रहे वृक्षारोपण को लेकर आपत्ति से डीएफओ को अवगत कराया। हरीश कवासी के अनुसार, डीएफओ ने मामले को संज्ञान में लेते हुए मुख्यालय लौटने के बाद पूरे प्रकरण की जांच कराने का भरोसा दिलाया है। साथ ही ग्रामीणों की समस्या का यथोचित निराकरण करने की बात कही गई है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि वन अधिकार पट्टा भूमि पर चल रहा वृक्षारोपण कार्य तत्काल रोका जाए और उन्हें अपनी आवंटित जमीन पर बिना किसी अनावश्यक रोक-टोक के खेती करने की अनुमति दी जाए। इसके साथ ही ग्रामीणों ने यह भी मांग रखी है कि यदि जांच में वन अधिकार कानून के तहत प्राप्त अधिकारों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

कांग्रेस ने भी पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि पट्टाधारी ग्रामीणों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए समाधान निकाला जाना चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी पट्टा भूमि पर खेती कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, इसलिए भूमि के उपयोग से जुड़ा कोई भी निर्णय उनकी आजीविका को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए।

कस्तूरी गांव में वन अधिकार पट्टा भूमि पर वृक्षारोपण को लेकर उठे विवाद के बाद अब ग्रामीणों की नजर वन विभाग की प्रस्तावित जांच पर है। डीएफओ के मुख्यालय लौटने के बाद जांच की बात कही गई है। अब देखना होगा कि जांच में क्या स्थिति सामने आती है और वन विभाग पट्टाधारी ग्रामीणों की मांगों पर क्या कार्रवाई करता है।