11 वर्षों से सेवा दे रहे विद्यामितान 13 जुलाई को विधानसभा कूच करेंगे, नियमितीकरण की मांग तेज

प्रांतीय अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) संघ ने 13 जुलाई को दुर्ग से विधानसभा, नया रायपुर तक पैदल मार्च और विधानसभा घेराव की घोषणा की है। संघ का कहना है कि पिछले 11 वर्षों से शिक्षा व्यवस्था में सेवाएं देने के बावजूद विद्यामितान नियमितीकरण, समान वेतन और सम्मानजनक सेवा शर्तों से वंचित हैं। आंदोलन को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक बताया गया है।

Jul 12, 2026 - 18:25
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11 वर्षों से सेवा दे रहे विद्यामितान 13 जुलाई को विधानसभा कूच करेंगे, नियमितीकरण की मांग तेज

UNITED NEWS OF ASIA. जमील अंसारी, कोरिया l छत्तीसगढ़ में वर्षों से सेवाएं दे रहे प्रांतीय अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन की राह पर हैं। संघ ने 13 जुलाई को दुर्ग से विधानसभा, नया रायपुर तक विशाल पैदल यात्रा और विधानसभा घेराव करने की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि पिछले 11 वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को संभालने के बावजूद विद्यामितान आज भी नियमितीकरण, सेवा सुरक्षा और सम्मानजनक रोजगार से वंचित हैं।

संघ के अनुसार आंदोलन की सूचना प्रशासन को पहले ही विधिवत दे दी गई है। संगठन का कहना है कि यह केवल शिक्षकों का आंदोलन नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की आवाज है, जिन्होंने वर्षों तक शिक्षा व्यवस्था को मजबूती देने के लिए कठिन परिस्थितियों में काम किया है।

प्रांतीय अतिथि शिक्षक संघ का कहना है कि जब प्रदेश के दूरस्थ वनांचल, पहाड़ी और सीमावर्ती क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी थी, तब विद्यामितानों ने बिना किसी भेदभाव के अपनी सेवाएं दीं। विशेष रूप से सरगुजा और बस्तर संभाग के कई ऐसे स्कूलों में भी उन्होंने लगातार शिक्षण कार्य किया, जहां पहुंचना आज भी चुनौतीपूर्ण माना जाता है। संगठन का दावा है कि उन्हीं विद्यालयों से पढ़कर निकले कई विद्यार्थी आज डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, पुलिसकर्मी, प्रशासनिक अधिकारी और अन्य शासकीय सेवाओं में कार्यरत हैं।

संघ का कहना है कि जिन शिक्षकों ने हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उनका अपना भविष्य आज भी असुरक्षित बना हुआ है। पिछले 11 वर्षों में सरकार की ओर से कई बार आश्वासन मिले, लेकिन नियमितीकरण सहित अन्य प्रमुख मांगों पर कोई स्थायी निर्णय नहीं लिया गया। इस लंबे इंतजार के दौरान कई विद्यामितान साथियों का निधन हो गया, जबकि अनेक परिवार आर्थिक कठिनाइयों से जूझते रहे।

संगठन ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से आयोजित किया जाएगा। उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि सरकार तक अपनी मांगों और समस्याओं को प्रभावी ढंग से पहुंचाना है।

संघ की प्रमुख मांगों में वर्षों से कार्यरत विद्यामितानों का नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन, संविलियन अथवा नियमित नियुक्ति तथा सम्मानजनक सेवा शर्तों का निर्धारण शामिल है। संगठन का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था की मजबूती तभी संभव है, जब शिक्षकों को भी स्थायित्व और सुरक्षा मिले।

विद्यामितान संघ ने कहा है कि वे किसी प्रकार का विशेष लाभ नहीं मांग रहे, बल्कि वर्षों की सेवा, समर्पण और मेहनत का न्यायपूर्ण सम्मान चाहते हैं। संगठन का मानना है कि यदि शिक्षा का भविष्य तैयार करने वाले शिक्षक स्वयं असुरक्षित रहेंगे, तो प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था भी लंबे समय तक मजबूत नहीं रह सकेगी।

संघ के अनुसार 13 जुलाई को सुबह 11 बजे दुर्ग से पैदल यात्रा शुरू होगी, जो विधानसभा, नया रायपुर तक पहुंचेगी। आंदोलन में प्रदेशभर के बड़ी संख्या में विद्यामितानों के शामिल होने की संभावना जताई गई है।