तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी ने मंत्री कोंडा सुरेखा को कैबिनेट से हटाया, बेटी की टिप्पणियों के बाद बढ़ा विवाद

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने वन मंत्री कोंडा सुरेखा को मंत्रिपरिषद से हटाने का फैसला किया है। यह कदम कोंडा सुरेखा की बेटी कोंडा सुष्मिता पटेल की ओर से मुख्यमंत्री और अन्य कांग्रेस नेताओं के खिलाफ की गई कथित विवादित टिप्पणियों के बाद सामने आया। तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासनात्मक समिति की सिफारिश के बाद मुख्यमंत्री ने राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को पत्र भेजकर सुरेखा को कैबिनेट से हटाने का अनुरोध किया है।

Sep 3, 2026 - 17:07
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तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी ने मंत्री कोंडा सुरेखा को कैबिनेट से हटाया, बेटी की टिप्पणियों के बाद बढ़ा विवाद

UNITED NEWS OF ASIA. तेलंगाना l राजनीति में मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और कैबिनेट मंत्री कोंडा सुरेखा के बीच टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को कोंडा सुरेखा को मंत्रिपरिषद से तत्काल प्रभाव से हटाने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को पत्र भेजकर सुरेखा को कैबिनेट से हटाने का अनुरोध किया है। यह घटनाक्रम कोंडा सुरेखा की बेटी कोंडा सुष्मिता पटेल की ओर से मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और कांग्रेस के अन्य नेताओं के खिलाफ की गई कथित विवादित टिप्पणियों के बाद सामने आया है।

बताया जा रहा है कि इस मामले को लेकर कांग्रेस के भीतर पहले से ही अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर चर्चा चल रही थी। तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासनात्मक समिति ने भी विवादित बयानों के मामले में कोंडा सुरेखा के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री की ओर से कैबिनेट से हटाने का कदम उठाया गया। इस घटनाक्रम ने राज्य सरकार और सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर राजनीतिक खींचतान को और बढ़ा दिया है।

पूरा विवाद उस समय गहराया जब कोंडा सुरेखा की बेटी सुष्मिता पटेल की ओर से मुख्यमंत्री और पार्टी के अन्य नेताओं को लेकर टिप्पणियां सामने आईं। कांग्रेस नेतृत्व ने इन टिप्पणियों को गंभीरता से लेते हुए कोंडा सुरेखा से स्पष्टीकरण मांगा था। हालांकि, सुरेखा ने नोटिस के आधार पर ही सवाल उठाते हुए कहा था कि बयान उनकी बेटी ने स्वयं दिए हैं और इसके लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। उनका कहना था कि उनकी बेटी की टिप्पणियों को उनके खिलाफ कार्रवाई का आधार बनाना उचित नहीं है।

कोंडा सुरेखा ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में भी अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने कहा था कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व से उन्हें मंत्रिमंडल में बने रहने देने का आग्रह किया है। सुरेखा ने अपने कार्यकाल का बचाव करते हुए दावा किया कि उन्होंने मंत्री के रूप में अच्छा काम किया है और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित कोई आरोप नहीं है। इसके बावजूद पार्टी के भीतर उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर दबाव बना रहा।

यह घटनाक्रम कोंडा सुरेखा की नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात के एक दिन बाद सामने आया। बताया जा रहा है कि इस मुलाकात के दौरान उन्होंने अपने खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद मामला पार्टी के आंतरिक अनुशासन से आगे बढ़कर मुख्यमंत्री और कोंडा परिवार के बीच राजनीतिक टकराव के रूप में देखा जाने लगा।

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की ओर से राज्यपाल को भेजे गए पत्र के बाद अब सुरेखा को मंत्रिपरिषद से हटाने की प्रक्रिया राज्यपाल स्तर पर आगे बढ़ेगी। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस के भीतर अनुशासन, नेताओं के बयानों और पार्टी नेतृत्व के फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कोंडा सुरेखा और उनकी बेटी की ओर से लगाए गए या दिए गए बयानों को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं। अब आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कोंडा सुरेखा इस फैसले के बाद क्या राजनीतिक रुख अपनाती हैं और कांग्रेस नेतृत्व के साथ उनके संबंध किस दिशा में जाते हैं।