“खेल-खेल में शिक्षा ही सीखने का सबसे बेहतरीन तरीका”— बलजीत छाबड़ा
नगरी संकुल में 48 स्टॉल के साथ एफएलएन मेला आयोजित किया गया, जिसमें खेल-आधारित गतिविधियों द्वारा बच्चों का आंकलन किया गया। नगर पंचायत अध्यक्ष बलजीत छाबड़ा ने कहा कि खेल-खेल में सीखना ही सबसे प्रभावी तरीका है। जिला के 873 विद्यालयों में एक साथ यह आयोजन किया गया।
UNITED NEWS OF ASIA.रिजवान मेमन, धमतरी | शैक्षिक एवं अनुसंधान परिषद छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार प्रदेश के सभी प्राथमिक विद्यालयों में 14 नवंबर को एफएलएन मेला आयोजित किया गया। निपुण भारत अभियान के तहत बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मकता के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु आयोजित इस मेले में बच्चों का खेल-खेल में आंकलन किया गया। नगरी संकुल में आयोजित मेले में भाषा, गणित, अंग्रेजी और बालवाड़ी के कुल 48 स्टॉल लगाए गए, जिनका संचालन विद्यालय के बच्चों ने स्वयं किया। ऑनलाइन प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को सभी स्टॉलों की रूपरेखा पूर्व से ही उपलब्ध कराई गई थी। विद्यार्थियों के आंकलन के बाद कमजोर बच्चों का चिन्हांकन कर उपचारात्मक शिक्षण से उनका अधिगम स्तर सुधारने की योजना बनाई गई है।
कार्यक्रम का आयोजन नगर पंचायत नगरी के विभिन्न प्राथमिक विद्यालयों—दुर्गा चौक, बांधापारा, चुरियारापारा, जंगलपारा, कोटपारा और राइस मिल पारा—के संयुक्त नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि नगर पंचायत अध्यक्ष बलजीत छाबड़ा, उपाध्यक्ष विकास बोहरा और सभी पार्षद उपस्थित रहे। स्टॉलों का अवलोकन करते हुए बलजीत छाबड़ा ने कहा कि “खेल-खेल में शिक्षा सीखने का सबसे बेहतरीन तरीका होता है।” एफएलएन जिला प्रशिक्षण प्रभारी कैलाश सोन ने बताया कि ‘करके देखबो, सीख के रहिबो’ थीम पर आधारित यह मेला बच्चों के आंकलन का सरल व रोचक माध्यम है, जिसमें विद्यार्थी स्वयं ही एक-दूसरे का आंकलन करते हैं।
डायट नगरी एफएलएन प्रभारी संगीता रणघाटी ने बताया कि जिले के 873 प्राथमिक विद्यालयों में मेला सफलतापूर्वक आयोजित हुआ और सभी विकासखंडों के अधिकारियों ने इसकी मॉनिटरिंग की। कार्यक्रम में शिक्षकों, शाला प्रबंधन समिति और पालकों ने बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई। आयोजन में लोचन साहू, उमेश सोम, हुलास सूर्याकर, दीपनारायण दुबे, चमन साहू, मेनका सोम, फलेन्द्री निषाद सहित अनेक शिक्षकों और कर्मचारियों का विशेष सहयोग रहा।