जयशंकर ने कहा कि भारत युद्ध समाप्त कराने के किसी भी ऐसे प्रयास में सहयोग करने के लिए तैयार है, जिससे शांति की दिशा में आगे बढ़ा जा सके। भारत लंबे समय से रूस और यूक्रेन दोनों के साथ अपने संबंध बनाए रखते हुए बातचीत और कूटनीति को संघर्ष के समाधान का महत्वपूर्ण माध्यम बताता रहा है। ऐसे में जयशंकर का ताजा बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे शांति प्रयासों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कीव में हुई बैठक के दौरान रूस-यूक्रेन संघर्ष से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इसमें ब्लैक सी यानी काला सागर में वाणिज्यिक शिपिंग पर हो रहे हमलों और क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति भी शामिल रही। ब्लैक सी क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बनी हुई है। दोनों पक्षों के बीच बातचीत में इन परिस्थितियों के प्रभाव और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने जयशंकर की कीव यात्रा का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारतीय विदेश मंत्री का यूक्रेन दौरा ऐसे समय हुआ है जब रूस के हमलों का असर शहरों, बंदरगाहों और नागरिक जहाजों तक दिखाई दे रहा है। सिबिहा ने यह भी कहा कि यूक्रेन कूटनीति के लिए तैयार है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील का स्वागत किया, जिसमें युद्ध को अंतहीन रूप से जारी रखने के बजाय इसे समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया गया था।
भारत और यूक्रेन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने को लेकर भी दोनों विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत हुई। बुनियादी ढांचे, फार्मास्यूटिकल्स, तकनीकी नवाचार और डिजिटलीकरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की गई। दोनों देशों ने अगली अंतर-सरकारी आयोग की बैठक आयोजित करने पर भी सहमति जताई है। इससे भारत और यूक्रेन के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को तीन साल से अधिक समय हो चुका है और इसके कारण दोनों देशों के साथ-साथ व्यापक क्षेत्र में भी मानवीय, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बनी हुई हैं। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के आकलनों के अनुसार, संघर्ष में बड़ी संख्या में सैनिकों और नागरिकों की जान गई है तथा लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। युद्ध के कारण बड़ी संख्या में लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ा है और बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है।
ऐसे समय में भारत का दोनों पक्षों के साथ संवाद बनाए रखना और शांति प्रक्रिया में संभावित भूमिका निभाने की इच्छा जताना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण है। हालांकि भारत की मध्यस्थता की भूमिका तभी प्रभावी हो सकती है जब रूस और यूक्रेन दोनों पक्ष इसके लिए सहमत हों। फिलहाल जयशंकर के बयान और यूक्रेन की सकारात्मक प्रतिक्रिया से यह संकेत जरूर मिला है कि बातचीत और कूटनीति के जरिए युद्ध समाप्त करने के प्रयासों के लिए भारत अपना सहयोग जारी रखने को तैयार है।