चीनी की बढ़ती कीमतों पर कांग्रेस का सरकार पर हमला, खड़गे ने एथेनॉल नीति और स्टॉक पर उठाए सवाल

: त्योहारों से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चीनी की कीमतों में करीब 40 फीसदी बढ़ोतरी, घटते स्टॉक और एथेनॉल नीति को लेकर सरकार से सवाल किए। वहीं सरकार ने कीमतों में वृद्धि के लिए एथेनॉल नीति को जिम्मेदार मानने से इनकार करते हुए मिलों की ओर से कीमत बढ़ाने, जमाखोरी और सट्टेबाजी को प्रमुख कारण बताया है।

Aug 22, 2026 - 13:22
Aug 22, 2026 - 13:23
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चीनी की बढ़ती कीमतों पर कांग्रेस का सरकार पर हमला, खड़गे ने एथेनॉल नीति और स्टॉक पर उठाए सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. त्योहारों से पहले देश में चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए चीनी के घटते स्टॉक, बढ़ती कीमतों और एथेनॉल नीति को लेकर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। खड़गे ने सवाल उठाया कि दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल भारत में चीनी का स्टॉक नौ साल के निचले स्तर तक पहुंचने की स्थिति क्यों बनी।

खड़गे ने दावा किया कि करीब तीन महीनों में चीनी की कीमतों में लगभग 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि त्योहारों के समय कीमतों में वृद्धि का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार से पूछा कि देश को चीनी के निर्यात पर रोक लगाने और 10 लाख टन चीनी ड्यूटी फ्री आयात करने की जरूरत क्यों पड़ी।

कांग्रेस ने चीनी की उपलब्धता और एथेनॉल उत्पादन के बीच संतुलन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। खड़गे ने कहा कि जब घरेलू बाजार में चीनी की कमी की बात सामने आ रही है और विदेशों से चीनी आयात करने की जरूरत पड़ रही है, तब गन्ने और अनाज का इस्तेमाल E20 के लिए एथेनॉल उत्पादन में करने की नीति की समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से पूछा कि घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए एथेनॉल नीति में बदलाव क्यों नहीं किया जा रहा है।

वहीं केंद्र सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए एथेनॉल नीति को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा के अनुसार देश में पर्याप्त चीनी स्टॉक मौजूद है। सरकार ने कीमतों में वृद्धि के पीछे मिलों द्वारा कीमत बढ़ाने, जमाखोरी और सट्टेबाजी को प्रमुख कारण बताया है।

सरकार के मुताबिक मौजूदा सीजन में चीनी उत्पादन करीब 306 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान 343 लाख मीट्रिक टन का था। अधिक बारिश और गन्ने की फसल में रेड रॉट तथा टॉप बोरर जैसी बीमारियों के कारण उत्पादन प्रभावित होने की बात सरकार की ओर से कही गई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति का असर भी घरेलू चीनी बाजार पर पड़ने की बात सामने आई है। सरकार के अनुसार 2026-27 में वैश्विक स्तर पर करीब 33 लाख मीट्रिक टन चीनी की कमी का अनुमान है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमत 30 जून को 474 डॉलर प्रति टन थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन हो गई।

चीनी की जमाखोरी और कृत्रिम कमी पर नियंत्रण के लिए सरकार ने डीलर्स के लिए 400 टन की स्टॉक लिमिट 30 नवंबर तक लागू की है। इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकार की टीमें चीनी मिलों में भौतिक सत्यापन कर रही हैं, ताकि वास्तविक स्टॉक की स्थिति का पता लगाया जा सके और अनियमितताओं पर नियंत्रण रखा जा सके।

चीनी की कीमतों को लेकर कांग्रेस और सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब निगाह इस बात पर है कि आने वाले दिनों में घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों और उपलब्धता की स्थिति कैसी रहती है।