80 प्रतिशत दिव्यांग छात्र नरेन्द्र उइके को मिली बैटरी चलित साइकिल, शिक्षा का सफर हुआ आसान

ग्राम कामाड़बरी के 80 प्रतिशत दिव्यांग छात्र नरेन्द्र उइके को शिक्षा जारी रखने में सहयोग के लिए बैटरी चलित साइकिल भेंट की गई। इस पहल से उनके दैनिक आवागमन में आसानी होगी और शिक्षा के प्रति उनका उत्साह और मजबूत होगा।

Jul 2, 2026 - 13:00
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80 प्रतिशत दिव्यांग छात्र नरेन्द्र उइके को मिली बैटरी चलित साइकिल, शिक्षा का सफर हुआ आसान

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l शिक्षा के प्रति दृढ़ संकल्प और कठिन परिस्थितियों से संघर्ष कर आगे बढ़ रहे 80 प्रतिशत दिव्यांग छात्र नरेन्द्र उइके को अब उनके सपनों की राह में नई गति मिल गई है। दैनिक आवागमन की कठिनाइयों को कम करने और उनकी शिक्षा को सुगम बनाने के उद्देश्य से उन्हें बैटरी चलित विशेष साइकिल भेंट की गई। इस पहल से अब नरेन्द्र के लिए विद्यालय तक पहुंचना पहले की तुलना में काफी आसान हो जाएगा।

नरेन्द्र उइके, पीतल सिंह उइके के पुत्र हैं और शारीरिक दिव्यांगता के बावजूद अपनी पढ़ाई पूरी लगन और मेहनत से जारी रखे हुए हैं। उनके शिक्षा के प्रति समर्पण को देखते हुए समाज के लोगों ने सहयोग का हाथ बढ़ाया और उनके लिए बैटरी चलित साइकिल उपलब्ध कराई, जिससे वे आत्मनिर्भर होकर अपने दैनिक कार्य और विद्यालय का सफर आसानी से तय कर सकेंगे।

यह पहल कमल कुमार धुर्वे के प्रयासों और आदिवासी नेता कामू बैगा के सहयोग से संभव हो सकी। नरेन्द्र को होने वाली आवागमन संबंधी परेशानियों को देखते हुए शीघ्र पहल की गई और आवश्यक समन्वय के बाद उन्हें बैटरी चलित साइकिल उपलब्ध कराई गई। इस पहल का उद्देश्य दिव्यांग छात्र की शिक्षा में किसी भी प्रकार की बाधा न आने देना और उसे आत्मनिर्भर बनाना है।

इस अवसर पर कामू बैगा ने समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग की सराहना करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विभाग की सकारात्मक सोच और समय पर किए गए सहयोग से जरूरतमंद छात्र तक सहायता पहुंच सकी। उन्होंने कहा कि शारीरिक दिव्यांगता किसी भी बच्चे के सपनों और शिक्षा के मार्ग में बाधा नहीं बननी चाहिए। यदि समाज और प्रशासन मिलकर सहयोग करें तो हर प्रतिभाशाली विद्यार्थी अपने लक्ष्य तक पहुंच सकता है।

कमल कुमार धुर्वे ने कहा कि समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता करना सबसे बड़ा सामाजिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र उइके का पढ़ाई के प्रति समर्पण सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा जारी रखने का उनका संकल्प यह संदेश देता है कि मजबूत इच्छाशक्ति के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।

बैटरी चलित साइकिल प्राप्त करने के बाद नरेन्द्र उइके और उनके परिवार ने खुशी व्यक्त की। उनके पिता पीतल सिंह उइके ने इस सहयोग के लिए कमल कुमार धुर्वे, कामू बैगा तथा समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों का आभार जताया। ग्रामीणों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए इसे दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

यह पहल न केवल एक छात्र के जीवन को आसान बनाने का प्रयास है, बल्कि समाज में यह संदेश भी देती है कि सामूहिक सहयोग और संवेदनशीलता से दिव्यांग विद्यार्थियों को समान अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। ऐसी पहलें शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समावेशन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।