उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में विस्थापन के दबाव के खिलाफ ग्रामीणों ने उठाई आवाज, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

धमतरी में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के ग्रामीणों ने कथित विस्थापन के दबाव को तत्काल रोकने की मांग को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने गांव में ही सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा ग्रामसभा की सहमति और अधिकारों का सम्मान करने की मांग की। साथ ही रिसगांव स्कूल में शिक्षकों के छह रिक्त पदों को जल्द भरने की मांग भी उठाई।

Aug 17, 2026 - 17:37
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उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में विस्थापन के दबाव के खिलाफ ग्रामीणों ने उठाई आवाज, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी l उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के प्रभावित गांवों में कथित विस्थापन के दबाव को तत्काल रोकने और ग्रामीणों को गांव में ही मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग को लेकर जल, जंगल, जमीन संघर्ष समिति सीतानदी-उदंती क्षेत्र धमतरी-गरियाबंद के प्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने सोमवार को जिला कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

ग्रामीणों ने ज्ञापन में कहा कि उनके पूर्वज पीढ़ियों से इन गांवों में निवास करते आ रहे हैं। जल, जंगल और जमीन से उनका सामाजिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक जुड़ाव है। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी पुश्तैनी जमीन और गांव छोड़कर विस्थापित नहीं होना चाहते।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन विभाग के अधिकारी गांवों में जाकर विस्थापन से संबंधित जानकारी दे रहे हैं और ग्रामीणों को गांव छोड़ने के लिए तैयार किया जा रहा है। इससे प्रभावित परिवारों में भय और असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे अपने गांव और भूमि से विस्थापित नहीं होना चाहते।

ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि ग्रामीणों पर गांव छोड़ने या विस्थापन के लिए किसी भी प्रकार का दबाव तत्काल रोका जाए। साथ ही ग्रामसभा की सहमति और उसके निर्णय का सम्मान किया जाए। ग्रामीणों ने गांवों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी।

पूर्व जिला पंचायत सदस्य मनोज साक्षी ने कहा कि वनांचल के ग्रामीण लंबे समय से वन अधिकार अधिनियम के तहत अपने अधिकारों और वन अधिकार पट्टों की मांग करते आ रहे हैं। उन्होंने लंबित एवं निरस्त वन अधिकार दावों का नियमानुसार निराकरण करने तथा ग्रामसभा की भूमिका और अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि पेसा और फॉरेस्ट राइट्स एक्ट के प्रावधानों का पूर्ण पालन किया जाना चाहिए। वनांचल में रहने वाले ग्रामीण जंगल और वन्यजीवों के संरक्षण के साथ सह-अस्तित्व में जीवन जीते आए हैं। जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन इसके साथ जंगल पर निर्भर लोगों के अधिकार और अस्तित्व की रक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

रिसगांव स्कूल में शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी उठाया

ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत रिसगांव के अंतर्गत संचालित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रिसगांव में शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी कलेक्टर के सामने रखा। ग्रामीणों ने विद्यालय में तत्काल शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की।

ग्रामीणों के अनुसार शिक्षकों की कमी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से कई बच्चे स्कूल छोड़ने लगे हैं, जिससे पालकों में भी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है।

ज्ञापन में विद्यालय के रिक्त पदों की जानकारी देते हुए बताया गया कि व्याख्याता गणित का एक पद, व्याख्याता भौतिक विज्ञान का एक पद, व्याख्याता रसायन विज्ञान का एक पद, व्याख्याता व्यवसाय विषय का एक पद और विज्ञान सहायक के दो पद रिक्त हैं। इस तरह विद्यालय में कुल छह पद रिक्त बताए गए हैं।

ग्रामीणों ने कहा कि शिक्षकों की कमी के बीच विद्यार्थियों के शिक्षा स्तर में सुधार की उम्मीद करना मुश्किल है। उन्होंने प्रशासन से रिक्त पदों पर जल्द से जल्द शिक्षक व्यवस्था करने की मांग की है। ग्रामीणों ने दोनों मामलों को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र कार्रवाई की मांग की।