बलरामपुर में छोटे झाड़ के जंगल की जमीन की रजिस्ट्री का आरोप, जनदर्शन में कलेक्टर से न्याय की गुहार

बलरामपुर जिले के देवीगंज गांव में खसरा नंबर 96 की 0.65 हेक्टेयर भूमि को लेकर कथित फर्जीवाड़े की शिकायत सामने आई है। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि छोटे झाड़ के जंगल के रूप में दर्ज भूमि को पट्टे की जमीन बताकर रजिस्ट्री कराई गई और अब मामले में प्रशासन से जांच तथा कार्रवाई की मांग की गई है।

Sep 28, 2026 - 14:50
 0  4
बलरामपुर में छोटे झाड़ के जंगल की जमीन की रजिस्ट्री का आरोप, जनदर्शन में कलेक्टर से न्याय की गुहार

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l बलरामपुर जिले के देवीगंज गांव में भूमि की कथित फर्जी रजिस्ट्री का मामला सामने आया है। मामले को लेकर पीड़ित पक्ष ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में देवीगंज के पटवारी हल्का नंबर 33 और राजस्व निरीक्षक मंडल रामानुजगंज के अंतर्गत आने वाली खसरा नंबर 96 की 0.65 हेक्टेयर भूमि को लेकर अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं। पीड़ित पक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत के अनुसार, संबंधित भूमि बंदोबस्त से पहले ‘छोटे झाड़ का जंगल’ के रूप में दर्ज थी। पीड़ित पक्ष का दावा है कि इस जमीन पर लंबे समय से राम काज, पिता स्वर्गीय देवधारी चौबे का कब्जा और काश्त चला आ रहा था। आरोप है कि बाद में इसी भूमि को पट्टे की जमीन बताकर कथित रूप से रजिस्ट्री करा दी गई।

मामले में जिस विक्रय पत्र का उल्लेख किया गया है, उसका क्रमांक 6504105/0110221/07351 बताया गया है। शिकायत के मुताबिक इस दस्तावेज के माध्यम से चन्द्रशेखर कुशवाहा, पिता स्वर्गीय बच्चू कुशवाहा और दिनेश पाल, पिता रामराज पाल, दोनों निवासी ग्राम देवीगंज द्वारा भूमि को रामावती, पति कैलाश चौबे के हाथों बेचे जाने का दावा किया गया है।

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जिस भूमि को लेकर विवाद है, उसकी वास्तविक स्थिति और राजस्व रिकॉर्ड की जांच किए बिना उसे पट्टे की भूमि बताकर रजिस्ट्री कराई गई। शिकायतकर्ता ने इसे भूमि संबंधी गंभीर अनियमितता बताते हुए प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।

मामले को लेकर पीड़ित पक्ष कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनदर्शन में पहुंचा और अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायत रखी। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि संबंधित भूमि के पुराने राजस्व रिकॉर्ड, कब्जे की स्थिति, पट्टा संबंधी दस्तावेज और विक्रय पत्र की वैधता की जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

शिकायत में अवैध रूप से कराई गई रजिस्ट्री के आधार पर किए गए नामांतरण को निरस्त करने की मांग भी की गई है। इसके साथ ही पीड़ित पक्ष ने संबंधित भूमि पर वास्तविक कब्जाधारी के अधिकार और कब्जे की बहाली की मांग प्रशासन के सामने रखी है।

भूमि विवाद से जुड़े मामलों में राजस्व रिकॉर्ड और पंजीयन दस्तावेजों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। ऐसे में इस मामले में प्रशासनिक जांच के बाद ही यह तय हो सकेगा कि भूमि की मूल प्रकृति क्या थी, रजिस्ट्री किन दस्तावेजों के आधार पर हुई और नामांतरण की प्रक्रिया नियमानुसार हुई या नहीं।

फिलहाल शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अब प्रशासन की ओर से जांच शुरू होने और संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण के बाद मामले की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।