बैठक में परीक्षा प्रणाली को लेकर छात्रों की प्रमुख मांग पर सरकार ने स्पष्ट किया कि MPSC की परीक्षाएं ऑफलाइन माध्यम से ही आयोजित की जाएंगी। साथ ही परीक्षा प्रणाली में भविष्य में कोई बदलाव करने से पहले छात्रों और संबंधित पक्षों के साथ चर्चा करने की बात कही गई है। यह मुद्दा छात्रों के आंदोलन की प्रमुख मांगों में शामिल था।
MPSC के सचिव के तबादले को लेकर भी सरकार ने निर्णय लिया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सचिव को तत्काल स्थानांतरित करने का आश्वासन दिया गया है। इसके अलावा आयोग के पूर्व और वर्तमान अध्यक्षों तथा सदस्यों के कामकाज को लेकर छात्रों की शिकायतों पर न्यायिक जांच कराने की बात कही गई है। यह जांच तीन महीने के भीतर कराने का आश्वासन दिया गया है।
छात्रों ने आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई थी। बैठक में मुख्यमंत्री ने संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए अध्यक्ष को सीधे राज्य सरकार या राज्यपाल द्वारा हटाए जाने की सीमा स्पष्ट की। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अनुच्छेद 317 के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।
भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। सरकार की ओर से बड़ी संख्या में रिक्त पदों को भरने की बात कही गई है। रिपोर्टों के मुताबिक तीन वर्षों की रिक्तियों को एक साथ घोषित करने और सेवानिवृत्ति से खाली होने वाले पदों के लिए पहले से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की योजना पर भी चर्चा हुई। हालांकि लगभग 70 हजार पदों का आंकड़ा छात्र प्रतिनिधियों द्वारा साझा किए गए अनुमान के रूप में सामने आया है और इसे अंतिम आधिकारिक रिक्ति संख्या के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।
छात्रों की एक अन्य मांग परीक्षा आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाने से संबंधित थी। बैठक में अलग-अलग परीक्षाओं के लिए बार-बार दस्तावेज जमा करने की जरूरत कम करने के उद्देश्य से सिंगल कार्ड प्रणाली विकसित करने पर भी चर्चा हुई।
इन आश्वासनों के बाद छात्र प्रतिनिधिमंडल ने 2 अक्टूबर को पुणे में प्रस्तावित आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया। यह आंदोलन पहले पुणे में आयोजित किए जाने की योजना थी और इसके लिए पुलिस से अनुमति भी ली गई थी।
हालांकि छात्रों के सभी समूहों की प्रतिक्रिया एक जैसी नहीं रही। कुछ छात्र प्रतिनिधियों ने बैठक के बाद लिए गए फैसलों और आंदोलन स्थगित करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। इन दावों को संबंधित छात्र प्रतिनिधियों के बयान के रूप में देखा जाना चाहिए।
फिलहाल MPSC छात्रों और सरकार के बीच हुई बैठक के बाद परीक्षा व्यवस्था, भर्ती, आयोग के कामकाज और जांच से जुड़े मुद्दों पर आगे की प्रक्रिया का इंतजार है। सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों के क्रियान्वयन पर छात्रों की आगे की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।