PM मोदी का दावा- 12 साल में 49.6 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर निकले, बोले- पहले योजनाओं का पैसा भाई-भतीजावाद की भेंट चढ़ता था
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र के पुणे दौरे के दौरान दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में देश के करीब 49.6 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर आए हैं। उन्होंने विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत में अत्यधिक गरीबी की दर 2011 के 27.1 फीसदी से घटकर 2023 में 2.6 फीसदी रह गई। पीएम मोदी ने पिछली सरकारों पर भाई-भतीजावाद का आरोप लगाते हुए कहा कि पहले योजनाओं का पैसा सही लाभार्थियों तक नहीं पहुंचता था, जबकि अब सरकारी सहायता सीधे खातों में भेजी जा रही है। इस दौरान उन्होंने पुणे में 21,800 करोड़ रुपये की मेट्रो परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया।
UNITED NEWS OF ASIA. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 नवंबर को महाराष्ट्र के पुणे दौरे के दौरान गरीबी उन्मूलन और सरकारी योजनाओं के लाभ को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत के करीब 49.6 करोड़ लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर निकले हैं। प्रधानमंत्री ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले गरीबी हटाने के नाम पर केवल नारे दिए जाते थे और योजनाओं का पैसा भाई-भतीजावाद की भेंट चढ़ जाता था। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार में सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों तक पहुंच रही है।
गरीबी कम होने पर विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश की कई पीढ़ियां गरीबी हटाओ के नारों और वादों के बीच बड़ी हुई हैं। पहले गरीबी के खिलाफ लड़ाई केवल नारों तक सीमित थी, लेकिन अब भारत जमीन पर गरीबी को परास्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने के साथ गरीबी कम करने के मामले में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 में जारी रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2011 में भारत की 27.1 फीसदी आबादी अत्यधिक गरीबी की स्थिति में थी, जो 2023 में घटकर 2.6 फीसदी रह गई। रिपोर्ट में प्रतिदिन 4.20 डॉलर की आय के पैमाने के आधार पर बताया गया है कि इस अवधि में करीब 49.6 करोड़ लोग गरीबी के इस स्तर से बाहर आए। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2023 में भी करीब 7.5 करोड़ लोग ऐसे थे, जिनकी दैनिक आय 3 डॉलर से कम थी। ये आंकड़े बताते हैं कि गरीबी में कमी के बावजूद आर्थिक चुनौतियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।
सरकारी योजनाओं और सीधे खाते में भुगतान पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले सरकारी योजनाओं के लिए आवंटित धन का पूरा लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुरानी व्यवस्था में भाई-भतीजावाद और बिचौलियों के कारण पैसा सही लोगों तक नहीं पहुंचता था। इसके विपरीत, उन्होंने मौजूदा सरकार की प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि अब सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा रही है।
पीएम मोदी ने गरीबी कम होने के पीछे रोजगार, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया। हालांकि, गरीबी में आई कमी के अलग-अलग कारणों और योजनाओं के वास्तविक योगदान का आकलन विस्तृत आर्थिक आंकड़ों के आधार पर किया जाना जरूरी है।
पुणे को 21,800 करोड़ रुपये की मेट्रो परियोजनाओं की सौगात
पुणे दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने करीब 21,800 करोड़ रुपये की मेट्रो परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इसमें 8,300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार 23 किलोमीटर लंबी मेट्रो लाइन-3 यानी पिंक लाइन का उद्घाटन शामिल है। यह लाइन हिंजेवाड़ी के IT हब को शिवाजीनगर के जिला न्यायालय मेट्रो स्टेशन से जोड़ेगी। इस परियोजना की एक विशेषता यह बताई गई कि इसका संचालन महिला ट्रेन ऑपरेटर करेंगी। साथ ही, इसकी बिजली की करीब 30 फीसदी जरूरत सौर ऊर्जा से पूरी करने की योजना है।
248 से 1,400 किलोमीटर तक पहुंचा मेट्रो नेटवर्क
प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 1984 में देश में पहली मेट्रो सेवा शुरू हुई थी, लेकिन 2014 तक मेट्रो नेटवर्क केवल 248 किलोमीटर तक पहुंच पाया था। उस समय सिर्फ पांच शहरों में मेट्रो चलती थी। उन्होंने दावा किया कि अब देश का परिचालन मेट्रो नेटवर्क करीब 1,400 किलोमीटर हो गया है और 26 शहरों में मेट्रो सेवाएं उपलब्ध हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि पुणे जैसे शहरों में बेहतर मेट्रो कनेक्टिविटी से IT, ऑटोमोबाइल, फार्मा, स्टार्टअप और विनिर्माण क्षेत्रों को गति मिलेगी। उनके मुताबिक, आधुनिक परिवहन सुविधाएं विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।