बालाघाट: मामूली सर्जरी के बाद 265 दिनों से कोमा में विवेक, इलाज में खर्च हुए 65 लाख रुपये

मध्य प्रदेश के बालाघाट में 36 वर्षीय विवेक तिरपुड़े पिछले कई महीनों से कोमा में हैं। परिजनों का आरोप है कि हाथ में फ्रैक्चर के इलाज के लिए सरदार पटेल मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराने के बाद सर्जरी के दौरान लापरवाही हुई, जिसके चलते उनकी हालत गंभीर हो गई। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर दो डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने डॉक्टर हितेश कावड़े को गिरफ्तार किया था, जबकि दूसरी डॉक्टर ने अंतरिम जमानत ली। परिजनों ने अस्पताल में मेडिकल नोट्स से छेड़छाड़ और बिना पंजीयन डॉक्टरों से इलाज कराने के आरोप भी लगाए हैं। विवेक के इलाज पर अब तक करीब 65 लाख रुपये खर्च होने की बात परिवार ने कही है।

Nov 3, 2026 - 10:40
 0  4
बालाघाट: मामूली सर्जरी के बाद 265 दिनों से कोमा में विवेक, इलाज में खर्च हुए 65 लाख रुपये

UNITED NEWS OF ASIA. सायमा नाज़, बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट के बूढ़ी इलाके में रहने वाले 36 वर्षीय विवेक तिरपुड़े पिछले कई महीनों से कोमा में हैं। परिवार के सदस्य लगातार उनकी देखभाल कर रहे हैं और उनके ठीक होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। परिजनों के मुताबिक विवेक कभी-कभी हल्की पलक झपकाते हैं या शरीर में मामूली हलचल होती है, जिससे परिवार को उम्मीद मिलती है। हालांकि उनकी स्वास्थ्य स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है।

परिजनों के अनुसार, 10 फरवरी को विवेक एक हादसे में घायल हो गए थे। इस घटना में उनके बाएं हाथ की हथेली में फ्रैक्चर हुआ था। इलाज के लिए उन्हें सरदार पटेल मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके भाई अमित तिरपुड़े का आरोप है कि अस्पताल में मामूली सर्जरी की बात कहकर विवेक को ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया, लेकिन करीब तीन घंटे तक परिवार को उनकी स्थिति की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। बाद में डॉक्टरों ने बताया कि विवेक को कार्डियक अरेस्ट आया है। इसके बाद से उनकी हालत गंभीर हो गई।

विवेक की भाभी दीक्षा रामटेके, जो स्वयं डॉक्टर हैं, का कहना है कि चोट मेटाकार्पल इंजरी थी। उनके अनुसार, यदि सर्जरी की आवश्यकता भी थी तो जनरल एनेस्थीसिया के बजाय रीजनल एनेस्थीसिया से उपचार संभव हो सकता था। परिवार ने डॉक्टरों पर उनकी आपत्तियों के बावजूद सर्जरी करने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है।

मामले की जांच के लिए तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की निगरानी में तीन डॉक्टरों की टीम गठित की गई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मेडिकल टीम ने विवेक को ग्लोबल हाइपोक्सिक इंजरी होने की बात कही। रिपोर्ट में एनेस्थीसिया के दौरान पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं मिलने से मस्तिष्क तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंचने की आशंका जताई गई। टीम के मुताबिक, स्थिति बिगड़ने पर विवेक को सीपीआर भी दिया गया, जबकि ऐसी आपात स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल में प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी पाई गई।

मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने डॉक्टर हितेश कावड़े और डॉक्टर सृष्टि जैन के खिलाफ मामला दर्ज किया था। पुलिस ने डॉक्टर हितेश कावड़े को गिरफ्तार किया, हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई। वहीं, डॉक्टर सृष्टि जैन ने अंतरिम जमानत प्राप्त की है। पुलिस के अनुसार, उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।

बालाघाट के पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा के मुताबिक, जांच के दौरान फॉरेंसिक रिपोर्ट में ऑपरेशन थिएटर से जुड़े मेडिकल नोट्स में कथित छेड़छाड़ की बात सामने आई। इसके बाद दोनों डॉक्टरों के खिलाफ दर्ज मामले में अतिरिक्त धाराएं जोड़ी गईं। परिजनों ने डॉक्टर प्रिंस वर्मा और डॉक्टर शुभम वैद्य के पंजीयन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि विवेक के इलाज के समय इन डॉक्टरों का मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल में पंजीयन नहीं हुआ था। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, दोनों ने मई 2026 में पंजीयन के लिए आवेदन किया था। इन आरोपों पर अस्पताल प्रबंधन का पक्ष उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।

विवेक के इलाज पर अब तक करीब 65 लाख रुपये खर्च होने की बात परिवार ने कही है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण घर पर अस्थायी आईसीयू की व्यवस्था की गई है और इलाज के लिए क्राउड फंडिंग के जरिए भी मदद जुटाई जा रही है। परिवार एक ओर विवेक के उपचार की व्यवस्था कर रहा है, तो दूसरी ओर न्याय के लिए पुलिस और अदालत के चक्कर लगा रहा है। मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है।