चक्रवात ‘मुरासु’ का आंध्र प्रदेश तट पर लैंडफॉल, कई राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ का अलर्ट
चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ को लेकर आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु में भारी बारिश की स्थिति बताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तूफान ने 3 नवंबर की सुबह ओंगोल के पास आंध्र प्रदेश के तट को पार किया। इसके प्रभाव से कई इलाकों में जलभराव, उड़ानों के रद्द होने और निचले क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बताया गया है। ओडिशा में भी बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ मंगलवार, 3 नवंबर की सुबह आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट को पार कर गया। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, तूफान का लैंडफॉल रात करीब एक बजे ओंगोल के पास शुरू हुआ और सुबह तक जारी रहा। यह तूफान नेल्लोर और नरसापुर के बीच ओंगोल के करीब तट से गुजरा। इस दौरान 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं, जबकि झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंची।
चक्रवात के प्रभाव से आंध्र प्रदेश के कई इलाकों में भारी बारिश हुई। विजयवाड़ा में बारिश के कारण कई सड़कों पर जलभराव की स्थिति बनी। तेज हवाओं और खराब मौसम के चलते हवाई सेवाएं भी प्रभावित हुईं। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, आंध्र प्रदेश के विभिन्न हवाई अड्डों से उड़ानें रद्द की गईं। चेन्नई एयरपोर्ट पर भी उड़ानों के संचालन पर असर पड़ने की जानकारी सामने आई है।
मौसम विभाग ने दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटीय और निचले इलाकों में भारी बारिश तथा समुद्र में उठने वाली ऊंची लहरों से जलभराव और बाढ़ का खतरा जताया था। विशेष रूप से बापटला, कृष्णा और प्रकाशम जिलों के निचले क्षेत्रों में समुद्री जल के प्रवेश की आशंका व्यक्त की गई थी। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में सतर्कता बरतने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के इंतजाम किए।
ओडिशा में भी चक्रवात का असर देखने को मिला। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरी जैसे जिलों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। पुरी सहित तटीय क्षेत्रों में बारिश और समुद्र में ऊंची लहरें उठने की खबरें सामने आईं। बचाव और राहत कार्यों के लिए एनडीआरएफ, ओडीआरएएफ और अग्निशमन विभाग की टीमों को तैनात किया गया।
चक्रवात का प्रभाव केवल आंध्र प्रदेश और ओडिशा तक सीमित रहने की आशंका नहीं थी। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक तमिलनाडु सहित आसपास के राज्यों में भी बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है। छत्तीसगढ़, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी मौसम प्रभावित होने की संभावना जताई गई थी। मध्य प्रदेश में भी 5 नवंबर तक आंधी और बारिश का दौर रहने का पूर्वानुमान दिया गया था। हालांकि, अलग-अलग जिलों के लिए मौसम की स्थिति और चेतावनी में बदलाव संभव है।
‘मुरासु’ नाम भारत की ओर से दिया गया है। तमिल भाषा में मुरासु का अर्थ ‘युद्ध का नगाड़ा’ बताया जाता है। यह तूफान बंगाल की खाड़ी में विकसित हुआ और तेजी से गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल गया।
गौरतलब है कि एक सप्ताह के भीतर बंगाल की खाड़ी में यह दूसरा चक्रवाती तूफान है। इससे पहले चक्रवात ‘अर्नब’ ने आंध्र प्रदेश के तट को प्रभावित किया था। लगातार दो चक्रवाती तूफानों के कारण पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों में मौसम संबंधी चुनौतियां बढ़ गई हैं। फिलहाल प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में हालात पर नजर रख रही हैं।
नोट: मौसम संबंधी चेतावनियां समय के साथ बदलती हैं। प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को ताजा जानकारी के लिए IMD और स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं का पालन करना चाहिए।