पुरुलिया में कुर्मी आंदोलन से जुड़े सभी मामलों की वापसी का ऐलान, शुभेंदु अधिकारी ने की कई घोषणाएं
पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में करम महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कुर्मी समुदाय से जुड़े आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार विधानसभा चुनाव से पहले संकल्प पत्र में किए गए वादों को पूरा करेगी। सरकार ने कुर्मी समुदाय के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। अधिकारी ने कुर्माली और राजबंशी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए प्रयास करने और कुर्मी विकास बोर्ड को फिर से सक्रिय करने की बात भी कही।
UNITED NEWS OF ASIA. पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में आयोजित करम महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कुर्मी समुदाय को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। रविवार को कराडी मैदान में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कुर्मी समुदाय के आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए मामलों को वापस लिया जाएगा। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम बंगाल के पश्चिमी जिलों में कुर्मी समुदाय की सामाजिक और राजनीतिक मांगें लंबे समय से चर्चा का विषय रही हैं।
शुभेंदु अधिकारी ने कार्यक्रम में कहा कि पिछली सरकार के दौरान आंदोलन में शामिल कुर्मी समुदाय के लोगों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि इस फैसले की घोषणा वह इससे पहले दुर्गापुर में आयोजित एक बैठक के दौरान कर चुके हैं। सितंबर 2025 में कुर्मी संगठनों ने अनुसूचित जनजाति यानी एसटी का दर्जा देने समेत कई मांगों को लेकर पश्चिम बंगाल के पश्चिमी हिस्सों में सड़क और रेल मार्गों पर आंदोलन किया था। इस दौरान पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल की ओर से मामले दर्ज किए गए थे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, आंदोलन से जुड़े मामलों में 51 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी, जिनमें 29 लोगों को पुरुलिया पुलिस और 22 लोगों को रेलवे सुरक्षा बल ने गिरफ्तार किया था।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर कुर्मी समुदाय के भीतर विभाजन पैदा करने का आरोप भी लगाया। यह उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा था। अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के संकल्प पत्र में कुर्मी समुदाय से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में काम करेगी। उन्होंने समुदाय के विकास के लिए चालू वित्त वर्ष के बजट में 50 करोड़ रुपये आवंटित किए जाने की जानकारी दी और कहा कि आने वाले समय में इस राशि को बढ़ाया जाएगा।
कुर्मी समुदाय की भाषा और सांस्कृतिक पहचान को लेकर भी मुख्यमंत्री ने घोषणा की। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार कुर्माली और राजबंशी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए प्रयास करेगी। कुर्माली भाषा मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल के पश्चिमी जिलों में रहने वाले कुर्मी समुदाय के बीच बोली जाती है, जबकि राजबंशी भाषा उत्तर बंगाल के राजबंशी समुदाय से जुड़ी है।
इसके अलावा शुभेंदु अधिकारी ने कुर्मी विकास बोर्ड को फिर से सक्रिय करने की बात भी कही। उनके मुताबिक, समुदाय की विकास संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार आगे भी कई कदम उठाएगी। कुर्मी समुदाय लंबे समय से एसटी दर्जे और कुर्माली भाषा को संवैधानिक मान्यता देने जैसी मांगों को लेकर आंदोलन करता रहा है। ऐसे में मामलों की वापसी और विकास योजनाओं से जुड़ी घोषणाओं को समुदाय से जुड़े प्रमुख मुद्दों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
पुरुलिया और पश्चिम बंगाल के अन्य पश्चिमी जिलों में कुर्मी समुदाय की महत्वपूर्ण सामाजिक उपस्थिति को देखते हुए इस घोषणा का राजनीतिक संदर्भ भी है। हालांकि, सरकार की ओर से घोषित मामलों की वापसी को लागू करने की प्रक्रिया और संबंधित मामलों पर आगे की कानूनी कार्रवाई प्रशासनिक स्तर पर तय होगी। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में समुदाय के लिए किए गए अन्य वादों को भी पूरा करने का भरोसा जताया।