ओवरलोड मिट्टी के डंपरों से ग्रामीण सड़कें क्षतिग्रस्त, भेरूंदा क्षेत्र के लोगों की बढ़ी परेशानी

भेरूंदा क्षेत्र में हाईवे और रेलवे निर्माण कार्यों के लिए मिट्टी का परिवहन कर रहे ओवरलोड डंपरों से ग्रामीण क्षेत्रों की पीडब्ल्यूडी सड़कों को नुकसान पहुंचने का मामला सामने आया है। पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ अधिकारियों ने सड़क क्षतिग्रस्त होने की बात स्वीकार करते हुए बताया कि इस संबंध में जिला प्रशासन को जानकारी दी गई है। लगातार भारी वाहनों की आवाजाही से ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है और सरकारी धन से बनी सड़कों के रखरखाव पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

Nov 5, 2026 - 10:55
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ओवरलोड मिट्टी के डंपरों से ग्रामीण सड़कें क्षतिग्रस्त, भेरूंदा क्षेत्र के लोगों की बढ़ी परेशानी

UNITED NEWS OF ASIA. घनश्याम शर्मा, भेरूंदा l मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के भेरूंदा क्षेत्र में ओवरलोड मिट्टी के डंपरों की आवाजाही से ग्रामीण सड़कों को नुकसान पहुंचने का मामला सामने आया है। हाईवे और रेलवे निर्माण कार्यों के लिए बड़ी मात्रा में मिट्टी का परिवहन किया जा रहा है। इसके लिए लगातार भारी डंपर ग्रामीण क्षेत्रों से गुजर रहे हैं। आरोप है कि इन वाहनों में निर्धारित क्षमता से अधिक मिट्टी भरी जा रही है, जिसके कारण लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी की सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं। सड़कों की खराब होती स्थिति से ग्रामीणों को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

ओवरलोड वाहनों से सड़कों पर बढ़ रहा दबाव

स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से निर्माण कार्यों के लिए मिट्टी ले जाने वाले डंपरों की आवाजाही ग्रामीण मार्गों पर लगातार बनी हुई है। भारी वाहनों के दबाव से कई स्थानों पर सड़कें खराब हो रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसी तरह ओवरलोड वाहनों का संचालन जारी रहा तो आने वाले समय में क्षेत्र की अन्य सड़कों की स्थिति भी बिगड़ सकती है। इसका सीधा असर आम लोगों, किसानों और रोजाना इन मार्गों से गुजरने वाले वाहन चालकों पर पड़ेगा।

पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने बताई सड़क की क्षमता

मामले को लेकर पीडब्ल्यूडी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि विभाग द्वारा ठेकेदारों के माध्यम से सड़कों का निर्माण कराया जाता है। निर्माण के बाद संबंधित ठेकेदार की ओर से सड़क की निर्धारित क्षमता और गुणवत्ता के अनुसार पांच वर्ष की वारंटी दी जाती है। इस अवधि में सड़क क्षतिग्रस्त होने पर नियमानुसार मरम्मत की जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है।

अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित क्षमता से अधिक भार वाले वाहन लगातार सड़कों पर चलते हैं तो सड़क को नुकसान पहुंचना स्वाभाविक है। ऐसे में सड़क की सामान्य उपयोग अवधि और उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है। इससे एक ओर ग्रामीणों को परेशानी होती है, वहीं दूसरी ओर सरकारी धन से निर्मित सड़कों की बार-बार मरम्मत की आवश्यकता पड़ सकती है।

कलेक्टर के संज्ञान में लाया गया मामला

पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि सड़क क्षतिग्रस्त होने और भारी वाहनों के लगातार आवागमन से जुड़ी पूरी जानकारी जिला सीहोर कलेक्टर के संज्ञान में लाई जा चुकी है। इसके बावजूद रेलवे और हाईवे निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदारों द्वारा मिट्टी का परिवहन लगातार जारी रहने की बात कही गई है। अधिकारियों के अनुसार, इस स्थिति में सड़कों को हो रहे नुकसान को रोकना जरूरी है।

ग्रामीणों को राहत मिलने का इंतजार

ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें खराब होने से लोगों को रोजाना आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, सड़क की क्षमता से अधिक भार वाले वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण जरूरी है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि निर्माण कार्यों के लिए मिट्टी परिवहन के दौरान ग्रामीण सड़कों की सुरक्षा और मरम्मत की जिम्मेदारी कौन सुनिश्चित करेगा।

अब ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन और संबंधित निर्माण एजेंसियों की कार्रवाई पर है। जरूरत इस बात की है कि ओवरलोड वाहनों पर नियमों के अनुसार कार्रवाई हो, मिट्टी परिवहन के लिए उपयुक्त मार्ग तय किए जाएं और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कराई जाए, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके और सरकारी धन से बनी सड़कों को बार-बार नुकसान न पहुंचे।