बेमेतरा में ग्रीष्मकालीन धान की खेती छोड़ने की अपील, भूजल संरक्षण के लिए किसानों से कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं ने मांगा सहयोग

बेमेतरा जिले में गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए प्रशासन ने जल संरक्षण अभियान तेज किया है। कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं ने किसानों से आगामी ग्रीष्मकालीन सीजन में धान की खेती नहीं करने और इसके स्थान पर चना, गेहूं तथा सरसों जैसी कम पानी वाली फसलें अपनाने की अपील की है। प्रशासन के अनुसार, पिछले वर्ष किसानों के सहयोग से जिले के बेमेतरा, बेरला और साजा विकासखंड वाटर क्रिटिकल श्रेणी से निकलकर सेमी-क्रिटिकल श्रेणी में आए हैं।

Nov 5, 2026 - 15:26
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बेमेतरा में ग्रीष्मकालीन धान की खेती छोड़ने की अपील, भूजल संरक्षण के लिए किसानों से कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं ने मांगा सहयोग

UNITED NEWS OF ASIA. अरुण पुरेना, बेमेतरा l छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में गिरते भूजल स्तर को नियंत्रित करने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन ने अभियान तेज कर दिया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी प्रतिष्ठा ममगाईं ने जिले के सभी किसानों से आगामी ग्रीष्मकालीन सीजन में धान की खेती नहीं करने की अपील की है। उन्होंने किसानों से चना, गेहूं और सरसों जैसी कम पानी में तैयार होने वाली वैकल्पिक फसलों को अपनाने का आग्रह किया है। प्रशासन का मानना है कि किसानों की सामूहिक भागीदारी से ही जिले में भूजल स्तर को सुरक्षित रखा जा सकता है।

किसानों के प्रयास से तीन विकासखंडों में हुआ सुधार

कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं ने बताया कि बेमेतरा जिला जल संकट की दृष्टि से वाटर क्रिटिकल जिले के रूप में चिन्हित रहा है। यहां लगातार गिरते भूजल स्तर को लेकर प्रशासन और किसानों ने पिछले वर्ष मिलकर विशेष पहल की थी। इस दौरान किसानों ने स्वेच्छा से ग्रीष्मकालीन धान की खेती नहीं करने का संकल्प लिया और इसके स्थान पर कम पानी की जरूरत वाली फसलों की खेती को प्राथमिकता दी।

प्रशासन के अनुसार, इस सामूहिक प्रयास का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। जिले के तीनों विकासखंड बेमेतरा, बेरला और साजा वाटर क्रिटिकल श्रेणी से निकलकर सेमी-क्रिटिकल श्रेणी में आ गए हैं। कलेक्टर ने इसे किसानों और प्रशासन के साझा प्रयासों से मिली महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस सुधार को बनाए रखने के लिए जल संरक्षण के प्रयासों को लगातार जारी रखना जरूरी है।

ग्राम सभाओं के माध्यम से किसानों को किया जा रहा जागरूक

पिछले वर्ष मिली सफलता को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से इस वर्ष भी जिले की सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जा रहा है। इन ग्राम सभाओं के माध्यम से किसानों को भूजल संरक्षण, पानी के विवेकपूर्ण उपयोग और फसल चयन के महत्व की जानकारी दी जा रही है। किसानों से ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलों को अपनाने का संकल्प लेने की अपील भी की जा रही है।

कलेक्टर ने कहा कि धान की खेती में अन्य कई फसलों की तुलना में अधिक पानी की आवश्यकता होती है। यदि गर्मी के मौसम में भी बड़े पैमाने पर धान की खेती की जाती है, तो भूजल पर दबाव बढ़ सकता है और जलस्तर में फिर गिरावट आने की आशंका रहेगी। इसके विपरीत चना, गेहूं और सरसों जैसी फसलें अपेक्षाकृत कम पानी में तैयार की जा सकती हैं। इससे पानी की बचत के साथ खेती को टिकाऊ बनाने में भी मदद मिल सकती है।

वैकल्पिक फसलों के लिए किसानों को मिलेगा सहयोग

जिला प्रशासन ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि वैकल्पिक फसलों की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। इसके तहत किसानों को बीज, तकनीकी सलाह और शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने के प्रयास किए जाएंगे। प्रशासन का उद्देश्य किसानों को ऐसी फसल प्रणाली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित न हो और प्राकृतिक जल संसाधनों का संरक्षण भी हो सके।

कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं ने जिले के किसानों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील करते हुए कहा कि पानी बचाना केवल वर्तमान की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़ा विषय है। उन्होंने किसानों से ग्रीष्मकालीन धान की खेती से बचने और कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों को अपनाने का आग्रह किया। प्रशासन का संदेश है कि सामूहिक प्रयासों से ही भूजल स्तर को सुरक्षित रखा जा सकता है। पानी बचाएं, भविष्य सुरक्षित बनाएं।