सुप्रीम कोर्ट ने बीएमसी कमिश्नर को दी राहत, वेतन पर लगी रोक और कारण बताओ नोटिस हटाया
सुप्रीम कोर्ट ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) आयुक्त के वेतन भुगतान पर लगाई गई रोक हटा दी है। अदालत ने आयुक्त को जारी कारण बताओ नोटिस भी रद्द कर दिया। सुनवाई के दौरान बीएमसी की ओर से बताया गया कि अदालत के तीन नवंबर दो हजार छब्बीस के आदेशों के अनुपालन में आवश्यक कदम उठाए जा चुके हैं। इसके बाद कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश के संबंधित पैराग्राफ वापस ले लिए।
UNITED NEWS OF ASIA. सुप्रीम कोर्ट ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के आयुक्त को बड़ी राहत देते हुए उनके वेतन भुगतान पर लगाई गई रोक हटा दी है। इसके साथ ही आयुक्त के खिलाफ जारी कारण बताओ नोटिस को भी रद्द कर दिया गया है। अदालत का यह फैसला बीएमसी प्रशासन की ओर से आदेशों के अनुपालन की जानकारी दिए जाने के बाद आया है।
बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान बीएमसी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आर. पी. भट्ट ने अदालत को बताया कि तीन नवंबर दो हजार छब्बीस को जारी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए आवश्यक कदम उठा लिए गए हैं। बीएमसी की ओर से अनुपालन की जानकारी मिलने के बाद अदालत ने अपने पूर्व आदेश के कुछ संबंधित पैराग्राफ वापस ले लिए। इससे आयुक्त को जारी कारण बताओ नोटिस और वेतन भुगतान पर लगी रोक समाप्त हो गई।
अतिक्रमण नहीं हटाने पर सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई थी सख्ती
दरअसल, मुंबई के बोरीवली इलाके में बस अड्डे के लिए निर्धारित जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया था। इस मामले में अदालत ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका और महाराष्ट्र सरकार को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। आदेशों के पालन में देरी और अतिक्रमण नहीं हटाए जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए बीएमसी आयुक्त के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की चेतावनी दी थी।
अदालत ने आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। साथ ही आदेशों का पालन होने तक आयुक्त और उनके निजी स्टाफ के मासिक वेतन भुगतान पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया था। इसके अलावा बीएमसी पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।
आदेशों के अनुपालन की जानकारी पर मिली राहत
सुनवाई के दौरान बीएमसी के वरिष्ठ अधिवक्ता आर. पी. भट्ट ने अदालत को बताया कि अतिक्रमण हटाने सहित पूर्व में जारी आदेशों के अनुपालन के लिए जरूरी कदम उठाए जा चुके हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि तेरह नवंबर दो हजार पच्चीस और अट्ठाईस जुलाई दो हजार छब्बीस के आदेशों के पालन की दिशा में भी कार्रवाई की गई है।
बीएमसी की ओर से दी गई जानकारी पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने संतोष व्यक्त किया और कहा कि अदालत के हस्तक्षेप के बिना यह काम संभव नहीं हो पाता। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने तीन नवंबर के अपने आदेश के संबंधित हिस्सों को वापस लेते हुए आयुक्त को राहत प्रदान की।
इस फैसले के बाद बीएमसी आयुक्त के वेतन भुगतान पर लगी रोक हट गई है और उनके खिलाफ जारी कारण बताओ नोटिस भी समाप्त हो गया है। यह घटनाक्रम बताता है कि सार्वजनिक जमीन से अतिक्रमण हटाने और न्यायालय के आदेशों का पालन करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट प्रशासनिक निकायों के प्रति सख्त रुख अपना रहा है।