ट्रंप प्रशासन की ICC पर बड़े प्रतिबंध की तैयारी, पूरे कोर्ट को निशाना बनाने की योजना
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट यानी ICC के खिलाफ अब तक की सबसे व्यापक कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। Reuters और Wall Street Journal की रिपोर्टों के मुताबिक, पूरे ICC को अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में लाने की तैयारी की गई है। प्रस्तावित प्रतिबंधों से अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों के लिए ICC के साथ वित्तीय लेनदेन पर रोक लग सकती है। यह कदम इजराइली नेताओं के खिलाफ ICC की कार्रवाई और अफगानिस्तान में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों से जुड़ी जांच को लेकर अमेरिका के विरोध के बीच सामने आया है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट यानी ICC के खिलाफ व्यापक प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है। Reuters के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ने पूरे ICC को प्रतिबंधों के दायरे में लाने की तैयारी कर ली है और इसकी घोषणा जल्द किए जाने की संभावना है। Wall Street Journal की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान इस फैसले को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। हालांकि, प्रतिबंधों की घोषणा का सटीक समय अभी स्पष्ट नहीं है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने रिपोर्टों पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की है।
प्रस्तावित कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका पहले ही ICC के कई अधिकारियों के खिलाफ प्रतिबंध लगा चुका है, लेकिन अब तक पूरे न्यायालय को एक संस्था के रूप में प्रतिबंधित नहीं किया गया था। Reuters के अनुसार, यदि प्रस्तावित प्रतिबंध लागू होते हैं तो अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों के लिए ICC के साथ वित्तीय लेनदेन करना विशेष अनुमति के बिना प्रतिबंधित हो सकता है। इससे अमेरिकी वित्तीय प्रणाली पर निर्भर ICC की कुछ गतिविधियों पर असर पड़ने की संभावना है।
अमेरिका और ICC के बीच विवाद नया नहीं है। ट्रंप प्रशासन लंबे समय से इस न्यायालय की उन कार्रवाइयों का विरोध करता रहा है, जिनका संबंध अमेरिका या उसके सहयोगियों से है। विवाद उस समय और बढ़ा जब ICC ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और तत्कालीन रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए। अमेरिकी प्रशासन ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई है और ICC की इजराइली नेताओं से जुड़ी जांच का विरोध किया है।
अमेरिका का एक अन्य प्रमुख विरोध अफगानिस्तान में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों से जुड़ी ICC की जांच को लेकर है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ICC को ऐसे देशों और नागरिकों के खिलाफ अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जो रोम संविधि के सदस्य नहीं हैं। अमेरिका स्वयं ICC का सदस्य देश नहीं है। दूसरी ओर, ICC अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नरसंहार, युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराधों की जांच और अभियोजन के लिए स्थापित न्यायिक संस्था है। न्यायालय की स्थापना रोम संविधि के तहत हुई और उसने 2002 में काम शुरू किया था।
जुलाई 2026 में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ICC के खिलाफ अमेरिकी अभियान को और व्यापक किया था। उन्होंने अन्य देशों से भी न्यायालय को अलग-थलग करने का आह्वान किया था। इससे पहले अमेरिका ICC के मुख्य अभियोजक करीम खान और कई न्यायाधीशों समेत न्यायालय से जुड़े अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा चुका है। अगस्त 2026 में ICC के अध्यक्ष और एक वरिष्ठ ट्रायल वकील पर भी अमेरिकी प्रतिबंध लगाए गए थे।
यदि पूरे ICC पर प्रस्तावित प्रतिबंध लागू होते हैं, तो इसका असर न्यायालय की वित्तीय और प्रशासनिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, IT सेवाओं, बीमा, जांच संबंधी काम और कुछ कर्मचारियों के वेतन भुगतान जैसी गतिविधियों के लिए अमेरिकी कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के साथ संबंध प्रभावित हो सकते हैं।
फिलहाल पूरे ICC पर प्रतिबंध लागू नहीं हुए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी प्रशासन ने इसके लिए तैयारी की है और घोषणा का समय अभी तय होना बाकी है। यह घटनाक्रम अमेरिका और ICC के बीच पहले से चले आ रहे विवाद को नए स्तर पर ले जा सकता है।