बलरामपुर शिक्षा विभाग में आदेश की अनदेखी? दो महीने बाद भी मूल स्कूल नहीं लौटे मंडल संयोजक, व्यवस्था पर उठे सवाल

बलरामपुर जिले के शिक्षा विभाग में मंडल संयोजकों की पदस्थापना और प्रभार व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि संभागीय आदेश जारी होने के दो महीने बाद भी कई मंडल संयोजक अपने मूल स्कूलों में नहीं लौटे हैं। कुछ शिक्षकों को दो-दो ब्लॉकों की जिम्मेदारी दिए जाने और कथित तौर पर नियमों की अनदेखी कर मलाईदार पदों पर नियुक्तियां किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। उच्च अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद पालन प्रतिवेदन नहीं भेजे जाने का दावा किया जा रहा है।

Nov 5, 2026 - 15:17
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बलरामपुर शिक्षा विभाग में आदेश की अनदेखी? दो महीने बाद भी मूल स्कूल नहीं लौटे मंडल संयोजक, व्यवस्था पर उठे सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि संभागीय स्तर से आदेश जारी होने के करीब दो महीने बाद भी जिले के कई मंडल संयोजक अपने मूल विद्यालयों में वापस नहीं लौटे हैं। इस स्थिति को लेकर शिक्षा विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था और उच्च अधिकारियों के निर्देशों के पालन पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

मामला मंडल संयोजकों की पदस्थापना और उन्हें दिए गए अतिरिक्त प्रभार से जुड़ा है। सामने आए आरोपों के मुताबिक, आदेश जारी होने के बावजूद संबंधित शिक्षकों को उनके मूल स्कूलों में वापस भेजने की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है। इसके चलते कुछ विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता और शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

दो-दो ब्लॉकों का प्रभार मिलने पर उठे सवाल

मामले में संतोष सिंह का नाम भी सामने आया है। आरोप है कि उन्हें दो-दो विकासखंडों का प्रभार सौंपा गया है, जबकि उनके मूल विद्यालयों में नियमित शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि यदि शिक्षक लंबे समय तक मूल स्कूल से बाहर रहेंगे तो विद्यार्थियों की पढ़ाई और विद्यालय की दैनिक व्यवस्था कैसे संचालित होगी।

स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ चुनिंदा लोगों को नियमों की अनदेखी कर महत्वपूर्ण और सुविधाजनक पदों पर जिम्मेदारी दी गई है। इनमें भाजपा जिलाध्यक्ष के भाई सहित कुछ अन्य लोगों को कथित तौर पर प्राथमिकता दिए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित नियुक्तियों से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

उच्च अधिकारियों के निर्देशों के बाद भी कार्रवाई पर सवाल

मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उच्च अधिकारियों के सख्त निर्देशों के बावजूद अब तक पालन प्रतिवेदन नहीं भेजे जाने का दावा किया जा रहा है। यदि यह स्थिति सही है तो सवाल उठता है कि संभागीय आदेश के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों ने अब तक कार्रवाई पूरी क्यों नहीं की।

प्रशासनिक आदेश जारी होने के बाद उसका पालन सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में दो महीने बीतने के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं होना विभागीय निगरानी और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े करता है।

विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ सकता है असर

मंडल संयोजकों की मूल विद्यालयों में वापसी और अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था केवल प्रशासनिक विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध स्कूलों की शैक्षणिक गतिविधियों से भी है। यदि किसी विद्यालय में स्वीकृत शिक्षकों की उपलब्धता प्रभावित होती है तो विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई पर असर पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि शिक्षा विभाग इस पूरे मामले की समीक्षा करे और स्पष्ट करे कि संबंधित शिक्षकों को किस आदेश के तहत अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है।

अब निगाहें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर हैं कि वे संभागीय आदेश के पालन, मंडल संयोजकों की पदस्थापना और कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर क्या कदम उठाते हैं। साथ ही विभाग से यह भी अपेक्षा है कि आरोपों पर अपना आधिकारिक पक्ष रखे, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था सुचारु बनी रहे।