हूतियों की पाकिस्तान और तुर्की को चेतावनी, सऊदी अरब के समर्थन में सैन्य दखल पर जवाब की धमकी
यमन में सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ते तनाव के बीच हूती नेता मोहम्मद अल-बुखैती ने पाकिस्तान और तुर्की को सैन्य हस्तक्षेप से दूर रहने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि दोनों देश सऊदी अरब के साथ मिलकर यमन में सैन्य कार्रवाई करते हैं तो हूती संगठन जवाबी कार्रवाई करेगा। दूसरी ओर, हूतियों ने अमेरिकी जहाजों को निशाना नहीं बनाने की बात कही है।
UNITED NEWS OF ASIA. यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव के बीच क्षेत्रीय संघर्ष को लेकर नई चेतावनी सामने आई है। हूती संगठन के वरिष्ठ नेता मोहम्मद अल-बुखैती ने पाकिस्तान और तुर्की को सऊदी अरब के समर्थन में यमन में सैन्य हस्तक्षेप करने के खिलाफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि दोनों देशों की सेनाएं सऊदी अरब के साथ मिलकर यमन में कार्रवाई करती हैं, तो हूती संगठन की ओर से जवाब दिया जाएगा। अल-बुखैती ने यह बयान इराकी टेलीविजन कार्यक्रम ‘अनदर रीडिंग’ में बातचीत के दौरान दिया।
मोहम्मद अल-बुखैती अंसार अल्लाह के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य और धमार के गवर्नर हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने पाकिस्तान और तुर्की के संभावित सैन्य हस्तक्षेप को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया। उनका कहना था कि यदि दोनों देश सऊदी अरब के साथ मिलकर यमन के संघर्ष में शामिल होते हैं, तो हूती संगठन इसका सैन्य जवाब देगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब यमन में संघर्ष दोबारा तेज हुआ है और हूतियों तथा सऊदी अरब के बीच हमलों को लेकर क्षेत्रीय तनाव बढ़ा है।
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान और तुर्की की भूमिका को लेकर भी चर्चा बढ़ी है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच रक्षा सहयोग को लेकर हुए समझौते के बाद इस बात पर ध्यान बढ़ा है कि क्षेत्रीय संकट की स्थिति में तीनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग किस रूप में सामने आता है। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने भी सऊदी अरब की क्षेत्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के समर्थन की बात कही है। पाकिस्तान ने भी सऊदी अरब के साथ अपनी एकजुटता दोहराई है।
इसी बीच हूतियों ने अमेरिका को लेकर अपेक्षाकृत अलग संदेश दिया है। मोहम्मद अल-बुखैती ने बताया कि संगठन ने अमेरिकी प्रशासन को यह भरोसा दिया है कि वह लाल सागर में अमेरिकी जहाजों को निशाना नहीं बनाएगा। उनके अनुसार, ओमान के माध्यम से अमेरिका और हूतियों के बीच अप्रत्यक्ष संपर्क हुआ था। यह संपर्क यमन के पश्चिमी तट से बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य की दिशा में हूती लड़ाकों की बढ़त के बाद हुआ। हूतियों ने कहा कि उनका मौजूदा संघर्ष मुख्य रूप से सऊदी अरब से जुड़ा है।
बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष के कारण इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बनी हुई है। अमेरिकी समुद्री प्रशासन ने भी लाल सागर, बाब अल-मंदेब और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में जहाजों के लिए सुरक्षा जोखिमों को लेकर चेतावनी जारी की है।
यमन में मौजूदा तनाव का असर केवल स्थानीय संघर्ष तक सीमित नहीं है। सऊदी अरब पर हूती हमलों, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय देशों की संभावित भागीदारी ने पश्चिम एशिया की स्थिति को और जटिल बना दिया है। ऐसे में पाकिस्तान और तुर्की को दी गई हूतियों की चेतावनी आने वाले दिनों में क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखी जा रही है। हालांकि, दोनों देशों की वास्तविक सैन्य भूमिका और आगे की कार्रवाई स्थिति के विकास पर निर्भर करेगी।