पश्चिम बंगाल में एक साल में RSS से जुड़े 1000 स्कूल खोलने का ऐलान, ‘वंदे मातरम’ को लेकर भी सख्त चेतावनी

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में अगले एक साल के भीतर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध शिक्षा संगठन विद्या भारती के माध्यम से 1,000 नए स्कूल खोलने की घोषणा की है। उन्होंने मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना में स्कूलों की संख्या बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। साथ ही स्कूलों में वंदे मातरम के पूरे संस्करण के गायन को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सरकारी सहायता बंद करने की चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री ने शिक्षा से जुड़े चार अलग-अलग विभागों को मिलाकर एक विभाग बनाने और मदरसा शिक्षा के लिए अलग प्रशासनिक ढांचा समाप्त करने का प्रस्ताव भी रखा।

Sep 5, 2026 - 13:28
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पश्चिम बंगाल में एक साल में RSS से जुड़े 1000 स्कूल खोलने का ऐलान, ‘वंदे मातरम’ को लेकर भी सख्त चेतावनी

UNITED NEWS OF ASIA. पश्चिम बंगाल में शिक्षा व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने गुरुवार को कोलकाता स्थित रामकृष्ण मिशन इंस्टीट्यूट ऑफ कल्चर में विद्या भारती की 74वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य में अगले एक साल के भीतर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध शिक्षा संगठन विद्या भारती के माध्यम से कम से कम 1,000 नए स्कूल खोले जाएंगे। मुख्यमंत्री के अनुसार इन स्कूलों को राज्य के अलग-अलग जिलों, नगरपालिकाओं और पंचायत क्षेत्रों में स्थापित करने पर जोर दिया जाएगा।

शुभेंदु अधिकारी ने विशेष रूप से मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना में विद्या भारती की शैक्षिक गतिविधियों का विस्तार करने की बात कही। उन्होंने संगठन से इन दोनों क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का आग्रह किया। कार्यक्रम में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक फिलहाल पश्चिम बंगाल में विद्या भारती के 313 स्कूल संचालित हो रहे हैं, जबकि पूरे देश में संगठन के 12,000 से अधिक स्कूल और करीब 10,000 बाल संस्कार केंद्र चलने की जानकारी दी गई।

मुख्यमंत्री ने शिक्षा प्रशासन में बड़े बदलाव का प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने कहा कि राज्य के स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और अल्पसंख्यक एवं मदरसा शिक्षा से जुड़े चार अलग-अलग विभागों को मिलाकर एक ही शिक्षा विभाग बनाया जाना चाहिए। उनके मुताबिक इससे शिक्षा व्यवस्था के प्रशासनिक संचालन को एकीकृत किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित व्यवस्था में मदरसा शिक्षा के लिए अलग प्रशासनिक ढांचा नहीं होगा।

वंदे मातरम के मुद्दे पर भी शुभेंदु अधिकारी ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि राज्य के स्कूलों में सुबह की प्रार्थना के दौरान विद्यार्थियों द्वारा वंदे मातरम का पूरा संस्करण गाया जाना चाहिए। उनके अनुसार यदि किसी स्कूल में इसका पूरा गायन नहीं किया जाता है तो सरकारी वित्तीय सहायता और अन्य सरकारी समर्थन बंद किया जा सकता है। यह चेतावनी सरकारी, सहायता प्राप्त, निजी स्कूलों और मदरसों को लेकर दी गई है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पिछली सरकारों की शिक्षा नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में राज्य की शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचा और यदि वही नीतियां आगे भी जारी रहतीं तो राज्य के मूल्य, विरासत, परंपरा, देशभक्ति और राष्ट्रवाद प्रभावित होते। उनके बयान में शिक्षा व्यवस्था के साथ सांस्कृतिक और राष्ट्रीय मूल्यों को जोड़ने पर भी जोर दिखाई दिया।

शुभेंदु अधिकारी की इस घोषणा के बाद पश्चिम बंगाल में शिक्षा के क्षेत्र में प्रस्तावित बदलाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। एक ओर विद्या भारती से जुड़े स्कूलों की संख्या तेजी से बढ़ाने की योजना सामने आई है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा विभागों के विलय और मदरसा शिक्षा के अलग प्रशासनिक ढांचे को समाप्त करने के प्रस्ताव से भी राजनीतिक और सामाजिक बहस बढ़ने की संभावना है।

सरकार की ओर से प्रस्तावित नई व्यवस्था और 1,000 स्कूल खोलने की योजना किस तरह लागू होती है, इस पर अब निगाह रहेगी। साथ ही वंदे मातरम को लेकर सरकारी सहायता बंद करने की चेतावनी पर भी आने वाले समय में अलग-अलग पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।