वरिष्ठ नागरिकों को सबसे ज्यादा ब्याज देने वाले बैंकों में इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक, ईएसएएफ स्मॉल फाइनेंस बैंक और सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक शामिल हैं। इन बैंकों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए अधिकतम ब्याज दर 8.50 प्रतिशत तक बताई गई है। वहीं जना स्मॉल फाइनेंस बैंक और उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक में यह दर 8.30 प्रतिशत तक है। शिवालिक और उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक वरिष्ठ नागरिकों को 8.25 प्रतिशत तक ब्याज दे रहे हैं। यहां यह समझना जरूरी है कि अधिकतम ब्याज दर किसी विशेष अवधि या निर्धारित शर्तों वाली एफडी पर ही मिल सकती है।
निजी क्षेत्र के बैंकों में डीसीबी बैंक वरिष्ठ नागरिकों को एफडी पर 8 प्रतिशत तक ब्याज दे रहा है। बंधन बैंक में अधिकतम दर 7.95 प्रतिशत, एसबीएम बैंक इंडिया में 7.80 प्रतिशत और इंडसइंड बैंक में 7.75 प्रतिशत तक बताई गई है। एक्सिस बैंक में वरिष्ठ नागरिकों के लिए अधिकतम ब्याज दर 7.25 प्रतिशत तक है। एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक में यह दर 7.10 प्रतिशत तक, जबकि आईडीबीआई बैंक में 7 प्रतिशत तक बताई गई है।
सरकारी बैंकों की बात करें तो बैंक ऑफ इंडिया वरिष्ठ नागरिकों को 7.45 प्रतिशत तक ब्याज दे रहा है। पंजाब एंड सिंध बैंक में यह दर 7.35 प्रतिशत, जबकि बैंक ऑफ बड़ौदा और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 7.25 प्रतिशत तक है। बैंक ऑफ महाराष्ट्र और इंडियन बैंक में अधिकतम दर 7.15 प्रतिशत बताई गई है। वहीं स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में वरिष्ठ नागरिकों के लिए एफडी की दर 7.05 प्रतिशत तक है।
विदेशी बैंकों में स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक वरिष्ठ नागरिकों को एफडी पर 7.10 प्रतिशत तक ब्याज दे रहा है। ड्यूश बैंक में अधिकतम दर 7 प्रतिशत और एचएसबीसी बैंक में 6 प्रतिशत तक बताई गई है। इस तरह अलग-अलग बैंकों में एफडी की ब्याज दर में अंतर देखने को मिलता है।
अब अगर 20 लाख रुपये की एफडी पर 8.50 प्रतिशत सालाना ब्याज की साधारण गणना करें तो एक साल में 1.70 लाख रुपये ब्याज बनता है। इस हिसाब से सालाना ब्याज को 12 महीनों में बांटने पर औसतन करीब 14,167 रुपये प्रतिमाह के बराबर रकम होती है। हालांकि यह जरूरी नहीं कि बैंक हर महीने इतनी राशि खाते में जमा करे, क्योंकि ब्याज भुगतान का तरीका एफडी के विकल्प पर निर्भर करता है। तीन साल के लिए साधारण ब्याज की गणना करें तो 5.10 लाख रुपये और पांच साल में 8.50 लाख रुपये ब्याज बनता है। चक्रवृद्धि ब्याज वाली एफडी में वास्तविक मैच्योरिटी राशि अलग हो सकती है।
बड़ी रकम की एफडी कराने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक और महत्वपूर्ण पहलू जमा बीमा है। डीआईसीजीसी के नियमों के अनुसार एक बैंक में एक जमाकर्ता के मूलधन और ब्याज समेत कुल 5 लाख रुपये तक की जमा पर बीमा कवर मिलता है। इसलिए बहुत बड़ी राशि को एक ही बैंक में रखने के बजाय अलग-अलग बैंकों में जमा बांटना जोखिम प्रबंधन की एक रणनीति हो सकती है।
एफडी चुनते समय केवल सबसे ज्यादा ब्याज दर को देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। निवेशक को एफडी की अवधि, समय से पहले निकासी के नियम, ब्याज भुगतान का विकल्प, टैक्स से जुड़े प्रभाव और जरूरत पड़ने पर रकम उपलब्ध होने की सुविधा को भी देखना चाहिए। खासकर रिटायरमेंट की बचत के मामले में कुछ धन ऐसी जगह रखना उपयोगी हो सकता है, जहां से जरूरत के समय आसानी से पैसा निकाला जा सके।
एफडी की ब्याज दरें बैंक और समय के अनुसार बदल सकती हैं। इसलिए निवेश करने से पहले संबंधित बैंक की मौजूदा ब्याज दर, लागू शर्तों और जमा नियमों की पुष्टि करना जरूरी है।