रेजीनगर उपचुनाव में नया मोड़, हुमायूं कबीर ने बेटे के लिए प्रचार से बनाई दूरी

पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव से पहले एजेयूपी प्रमुख हुमायूं कबीर ने अपने बेटे और पार्टी उम्मीदवार गुलाम नबी आजाद के लिए जमीनी चुनाव प्रचार नहीं करने का ऐलान किया है। कबीर ने प्रशासन पर पार्टी कार्यकर्ताओं को परेशान करने, गिरफ्तार करने और धमकाने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि वे सोशल मीडिया के जरिए मतदाताओं से संवाद करेंगे और मतदान के दिन मैदान में रहेंगे। यह घटनाक्रम 6 अक्टूबर को होने वाले रेजीनगर उपचुनाव से पहले सामने आया है।

Sep 21, 2026 - 13:19
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रेजीनगर उपचुनाव में नया मोड़, हुमायूं कबीर ने बेटे के लिए प्रचार से बनाई दूरी

UNITED NEWS OF ASIA. कोलकाता। पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को होने वाले रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव से पहले राजनीतिक घटनाक्रम लगातार बदल रहा है। एजेयूपी प्रमुख हुमायूं कबीर ने अपने बेटे और पार्टी उम्मीदवार गुलाम नबी आजाद के लिए जमीनी चुनाव प्रचार से दूर रहने का ऐलान किया है। कबीर ने इस फैसले के पीछे प्रशासन की कथित कार्रवाई और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ व्यवहार को कारण बताया है। उनके बयान के अनुसार, वह सोशल मीडिया के माध्यम से मतदाताओं तक पार्टी का संदेश पहुंचाएंगे और मतदान के दिन क्षेत्र में मौजूद रहेंगे।

हुमायूं कबीर ने आरोप लगाया कि जिन लोगों से वह मिलते या बातचीत करते हैं, उनमें से कुछ को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि एजेयूपी के 25 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। कबीर ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में पार्टी के लिए सामान्य तरीके से प्रचार करना मुश्किल है। उन्होंने यह भी कहा कि वे मतदाताओं से सोशल मीडिया के जरिए संपर्क बनाए रखेंगे और मतदान के दिन चुनाव प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए मैदान में उतरेंगे। ये आरोप हुमायूं कबीर के हैं और इनकी पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं हुई है।

कबीर ने प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी अब प्रचार अभियान पर निर्भर रहने के बजाय जनता के फैसले को स्वीकार करेगी। उन्होंने पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए और कहा कि सरकारी अधिकारियों को संविधान के अनुसार काम करना चाहिए। उनके बयान के बाद रेजीनगर उपचुनाव की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।

हुमायूं कबीर के इस फैसले के कुछ समय बाद उनके बेटे गुलाम नबी आजाद ने भी चुनाव प्रचार से दूरी बनाए रखने की बात कही। गुलाम नबी आजाद रेजीनगर सीट से एजेयूपी के उम्मीदवार हैं। यह सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। कबीर ने हालिया विधानसभा चुनाव में रेजीनगर से जीत दर्ज करने के बाद नौदा सीट को बनाए रखने का फैसला किया था, जिसके बाद रेजीनगर में उपचुनाव की स्थिति बनी।

रेजीनगर उपचुनाव का राजनीतिक परिदृश्य पहले से ही कई घटनाक्रमों के कारण चर्चा में है। टीएमसी के रबीउल आलम चौधरी ने नामांकन वापस लेने की घोषणा की थी, लेकिन बाद में अपना फैसला बदल दिया। इसके अलावा रेजीनगर में अलग-अलग राजनीतिक दलों और गुटों के उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। रिपोर्टों के मुताबिक यहां एजेयूपी, भाजपा, टीएमसी के अलग-अलग गुट, कांग्रेस और वाम दलों के उम्मीदवारों के बीच मुकाबला है।

इसी बीच नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर भी पश्चिम बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ है। ममता बनर्जी के गुट की उम्मीदवार संचित प्रधन डे के नाम वापस लेने के बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की। बाद में मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद इस फैसले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं। गिरफ्तारी पुराने मामलों से संबंधित बताई गई है, जबकि कांग्रेस और ममता बनर्जी के गुट की ओर से कार्रवाई के समय को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

रेजीनगर में हुमायूं कबीर के प्रचार से हटने के फैसले ने उपचुनाव के बीच एक और नया राजनीतिक घटनाक्रम जोड़ दिया है। हालांकि उन्होंने जमीनी प्रचार से दूरी बनाने की घोषणा की है, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए मतदाताओं से संपर्क बनाए रखने की बात कही है। अब चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ यह देखना होगा कि विभिन्न दल और उम्मीदवार अपने प्रचार अभियान को किस तरह आगे बढ़ाते हैं। रेजीनगर में मतदान 6 अक्टूबर को होना है और इसके बाद मतगणना के जरिए चुनाव परिणाम सामने आएगा।