तिल्दा में सनातन संस्कृति और अध्यात्म पर विशेष परिचर्चा, ब्रह्माकुमार रामनाथ ने आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का किया आह्वान

तिल्दा-नेवरा के ज्ञान ज्योति भवन में ‘सनातन संस्कृति का आधार : अध्यात्म’ विषय पर विशेष परिचर्चा एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमार रामनाथ ने सनातन संस्कृति के आध्यात्मिक मूल्यों और आत्मिक दृष्टि के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में धर्म एवं अध्यात्म प्रेमी शामिल हुए।

Sep 21, 2026 - 11:44
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तिल्दा में सनातन संस्कृति और अध्यात्म पर विशेष परिचर्चा, ब्रह्माकुमार रामनाथ ने आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का किया आह्वान

UNITED NEWS OF ASIA. अशोक मिश्रा, तिल्दा-नेवरा। धर्म एवं अध्यात्म प्रेमियों के लिए रविवार की शाम ब्रह्माकुमारीज़ तिल्दा सेवाकेंद्र स्थित ज्ञान ज्योति भवन में विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय ‘सनातन संस्कृति का आधार : अध्यात्म’ रखा गया, जिसमें सनातन संस्कृति के आध्यात्मिक मूल्यों, आत्मिक चेतना और जीवन में राजयोग के महत्व पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में ब्रह्माकुमारीज़ मुख्यालय माउंट आबू, राजस्थान से धार्मिक प्रभाग के राष्ट्रीय संयोजक ब्रह्माकुमार रामनाथ उपस्थित रहे। उनके साथ तिल्दा गुरुद्वारा प्रमुख मोहन, सिंधी समाज प्रमुख चम्मनलाल, ब्रह्माकुमारीज़ के वरिष्ठ राजयोगी जयेश तथा तिल्दा सेवाकेंद्र संचालिका बीके प्रियंका मंच पर उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम की शुरुआत श्याम्भवी द्वारा गणेश वंदना पर प्रस्तुत सुंदर नृत्य से हुई। इसके बाद अंजू सोनी और बिंदु वर्मा ने समूह गीत प्रस्तुत कर अतिथियों एवं उपस्थितजनों का स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान आध्यात्मिक विषय पर विचार-विमर्श के साथ सनातन संस्कृति के मूल स्वरूप और उसके जीवनोपयोगी संदेशों को समझाने का प्रयास किया गया।

मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमार रामनाथ ने सनातन शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि सनातन का अर्थ ऐसी सत्ता या सत्य से है, जो सदैव विद्यमान रहे। उन्होंने आध्यात्मिक दृष्टिकोण से आत्मा और शरीर के संबंध को समझाते हुए कहा कि मनुष्य मूल रूप से आत्मा है और शरीर आत्मा का माध्यम या वस्त्र है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति की मूल शिक्षाओं में आत्मिक चेतना का विशेष महत्व है। इसी प्रकार के आध्यात्मिक संदेशों की झलक गीता और रामायण जैसे धार्मिक ग्रंथों में भी मिलती है। उन्होंने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से बताया कि जब व्यक्ति स्वयं को आत्मिक दृष्टि से देखने लगता है, तो उसके जीवन में प्रेम, शांति, आनंद और आंतरिक शक्ति जैसे गुण विकसित होने लगते हैं।

रामनाथ ने तिल्दा के लोगों से सनातन संस्कृति के आध्यात्मिक मूल्यों को समझने और उन्हें अपने दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अध्यात्म केवल धार्मिक चर्चा तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के विचारों, व्यवहार और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम भी बन सकता है।

तिल्दा गुरुद्वारा प्रमुख मोहन ने कहा कि गुरु-वाणी में भी आध्यात्मिक ज्ञान के महत्व को विशेष स्थान दिया गया है। आध्यात्मिक ज्ञान व्यक्ति को कुमति से दूर कर संतुष्टि की ओर ले जाता है और लोभ जैसे विकारों से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है। समाजसेवी हीरानंद हरिरामानी ने कविता के माध्यम से अध्यात्म के महत्व को प्रस्तुत किया। सिंधी समाज प्रमुख चम्मनलाल ने रामनाथ का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें पुनः तिल्दा आने का निमंत्रण दिया।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न समाजों की ओर से ब्रह्माकुमार रामनाथ का सम्मान किया गया। सिख समाज की ओर से मोहन ने शॉल भेंट कर सम्मान किया। सिंधी समाज के प्रबुद्धजनों ने रामनाथ, जयेश और बीके प्रियंका का शॉल एवं श्रीफल से सम्मान किया। वहीं जैन समाज की ओर से सुदेश जैन, सौरभ जैन और पार्षद रानी जैन ने सम्मान किया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर बीके प्रियंका ने राजयोग ध्यान कराया। ध्यान के माध्यम से उपस्थितजनों को सनातन धर्म की आध्यात्मिक यात्रा की अनुभूति कराई गई। राजयोग ध्यान के बाद कार्यक्रम स्थल का वातावरण शांत, सकारात्मक और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण नजर आया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने आध्यात्मिक संदेशों को आत्मसात करते हुए जीवन में सकारात्मक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा ली।