इस खुशखबरी की जानकारी केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री Bhupender Yadav ने साझा की। उन्होंने इसे भारत में वन्यजीव संरक्षण के लिए एक ऐतिहासिक और गर्व का क्षण बताया। मंत्री ने कहा कि ज्वाला और उसके शावकों का स्वस्थ जन्म देश में चीतों की पुनर्स्थापना के प्रयासों की सफलता का मजबूत संकेत है।
जानकारी के अनुसार ज्वाला नामक यह मादा चीता मूल रूप से नामीबिया से लाई गई थी और यह भारत में सफलतापूर्वक प्रजनन करने वाली चीताओं में से एक है। ज्वाला अब तीसरी बार मां बनी है, जो यह दर्शाता है कि कूनो का प्राकृतिक वातावरण चीतों के अनुकूल साबित हो रहा है।
इन पांच नए शावकों के जन्म के साथ भारत में जन्मे चीतों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। अब तक भारत में 33 शावक सफलतापूर्वक जन्म ले चुके हैं, जो इस परियोजना की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यह भारत में चीतों के दसवें सफल जन्म (लिटर) के रूप में दर्ज किया गया है।
उल्लेखनीय है कि भारत में चीते वर्ष 1952 में विलुप्त घोषित कर दिए गए थे। इसके बाद कई दशकों तक देश में चीते नहीं पाए गए। लेकिन वर्ष 2022 में भारत सरकार ने प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत की, जिसके तहत अफ्रीकी चीतों को भारत लाकर यहां के घास के मैदानों में बसाने की योजना बनाई गई। इसी योजना के तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को लाकर कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा गया था।
कूनो नेशनल पार्क को विशेष रूप से इसलिए चुना गया क्योंकि यहां का घास का मैदान, शिकार की उपलब्धता और विस्तृत जंगल चीतों के लिए उपयुक्त माना जाता है। वन विभाग के अधिकारियों और विशेषज्ञों की एक टीम लगातार इन चीतों की निगरानी कर रही है और उनके स्वास्थ्य, भोजन और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह प्रजनन जारी रहा तो आने वाले वर्षों में भारत में चीतों की एक स्थिर और मजबूत आबादी स्थापित हो सकती है। इससे न केवल जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देश में वन्यजीव पर्यटन को भी नई पहचान मिलेगी।
कूनो से आई यह खुशखबरी देश के लिए गर्व का विषय है और यह दर्शाती है कि सही रणनीति, वैज्ञानिक प्रबंधन और समर्पित प्रयासों के जरिए विलुप्त हो चुकी प्रजातियों को भी फिर से प्रकृति में स्थापित किया जा सकता है।