लघु उद्योगों और MSME को मजबूत बनाकर विकसित छत्तीसगढ़ का रोडमैप तैयार कर रही सरकार: वित्त मंत्री ओपी चौधरी

रायपुर के साइंस कॉलेज परिसर में आयोजित 14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि सरकार लघु उद्योगों, MSME, स्टार्टअप, मैन्युफैक्चरिंग, रोजगार और निवेश को बढ़ावा देकर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में दीर्घकालिक रोडमैप पर काम कर रही है। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के साथ छत्तीसगढ़ को अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाने के लिए ‘छत्तीसगढ़ अंज़ोर विजन डॉक्यूमेंट’ का उल्लेख किया। उन्होंने रोजगार सृजन के लिए लेबर इंटेंसिव मैन्युफैक्चरिंग और छोटे उद्योगों को मजबूत करने पर जोर दिया।

Sep 21, 2026 - 11:38
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लघु उद्योगों और MSME को मजबूत बनाकर विकसित छत्तीसगढ़ का रोडमैप तैयार कर रही सरकार: वित्त मंत्री ओपी चौधरी

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर के साइंस कॉलेज परिसर में लघु उद्योग भारती द्वारा आयोजित 14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में वित्त मंत्री ओपी चौधरी शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने छत्तीसगढ़ में लघु उद्योगों, MSME, स्टार्टअप, मैन्युफैक्चरिंग, रोजगार और निवेश की संभावनाओं पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और इसी विकास यात्रा में छत्तीसगढ़ को भी देश के अग्रणी राज्यों के साथ आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार दीर्घकालिक रोडमैप के साथ काम कर रही है।

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए स्पष्ट दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ काम किया जा रहा है। विकास के साथ देश की विरासत और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में आगे तेजी से विस्तार की संभावनाएं हैं और आने वाले वर्षों में विकास की गति को बनाए रखने के लिए संरचनात्मक सुधारों तथा दीर्घकालिक नीतियों की आवश्यकता होगी।

उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजना विभाग द्वारा तैयार किए जा रहे ‘छत्तीसगढ़ अंज़ोर विजन डॉक्यूमेंट’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य वर्ष 2047 तक विकसित भारत की यात्रा में छत्तीसगढ़ की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना है। राज्य को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में आगे ले जाने के लिए दीर्घकालिक लक्ष्य निर्धारित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2047 का लक्ष्य केवल दूर की योजना नहीं है, बल्कि इसे चरणबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए 2030 और 2035 जैसे मध्यकालिक लक्ष्यों के साथ अल्पकालिक और वार्षिक लक्ष्य भी निर्धारित किए जा रहे हैं।

वित्त मंत्री ने आर्थिक सुधारों और दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के विकास के लिए भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर नीतियां तैयार करना जरूरी है। उनके अनुसार, अतीत में 21वीं सदी और विजन 2020 जैसे लक्ष्य निर्धारित किए गए थे, लेकिन उनके अनुरूप दीर्घकालिक रोडमैप और नीतिगत सुधारों की कमी रही। उन्होंने वर्ष 1991 के आर्थिक संकट का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर की आर्थिक परिस्थितियों से सीख लेकर भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत आधार तैयार करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नवीकरणीय ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। दीर्घकालिक विकास योजनाओं का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की नींव तैयार करना है। राज्य स्तर पर भी औद्योगिक क्षमता को बढ़ाने और निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि भारत में सर्विस सेक्टर का विस्तार हुआ है, लेकिन रोजगार के अधिक अवसर पैदा करने के लिए मैन्युफैक्चरिंग और विशेष रूप से लेबर इंटेंसिव मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना जरूरी है। लघु उद्योग और MSME स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता के अवसर पैदा करने के साथ-साथ सप्लाई चेन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए राज्य में छोटे उद्योगों और MSME के विस्तार के लिए अनुकूल औद्योगिक वातावरण तैयार करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि स्टार्टअप, मैन्युफैक्चरिंग, निवेश और रोजगार को बढ़ावा देना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उद्योग जगत और उद्यमियों की भागीदारी से छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता को नई गति दी जा सकती है। सरकार का प्रयास है कि नीतिगत सुधारों, निवेश के अनुकूल माहौल और उद्यमिता को प्रोत्साहन देकर राज्य में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार किया जाए।

14वें इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में वित्त मंत्री के संबोधन में लघु उद्योगों और MSME की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में आगे बढ़ने के लिए उद्योगों, उद्यमियों और छोटे कारोबारियों की भागीदारी महत्वपूर्ण है। सरकार दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए औद्योगिक क्षेत्र को मजबूत करने और रोजगार के नए अवसर तैयार करने की दिशा में काम कर रही है।