फाइलों में दफन ‘अपना घर’ का सपना: कोरिया में प्रधानमंत्री आवास योजना पर प्रशासनिक उदासीनता के सवाल

कोरिया जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) कागजों में ही सिमटकर रह गई है। हजारों स्वीकृत आवास निर्माणाधीन हैं और हितग्राही भुगतान व प्रशासनिक लापरवाही से जूझ रहे हैं।

Mar 20, 2026 - 11:33
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फाइलों में दफन ‘अपना घर’ का सपना: कोरिया में प्रधानमंत्री आवास योजना पर प्रशासनिक उदासीनता के सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. प्रदीप पाटकर, कोरिया |केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)’ का उद्देश्य हर गरीब को पक्का घर उपलब्ध कराना है, लेकिन कोरिया जिले में यह योजना प्रशासनिक उदासीनता और सुस्त कार्यप्रणाली के कारण दम तोड़ती नजर आ रही है।

आंकड़ों में प्रगति, जमीन पर ठहराव

सत्र 2025-26 के तहत जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 4,502 आवास स्वीकृत किए गए हैं। कागजों पर यह उपलब्धि प्रभावशाली दिखती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। अधिकांश आवास आज भी ‘निर्माणाधीन’ की स्थिति में अटके हुए हैं।

वनांचल क्षेत्रों में स्थिति और अधिक चिंताजनक है, जहां निर्माण सामग्री की आपूर्ति समय पर नहीं हो पा रही है और लाभार्थियों को किस्तों का भुगतान भी समय पर नहीं मिल रहा।

फाइलों तक सीमित निगरानी

योजना की निगरानी की जिम्मेदारी जिला पंचायत से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक तय है, लेकिन वास्तविकता में यह जिम्मेदारी कागजों तक सिमटकर रह गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी एसी कमरों में बैठकर केवल औपचारिकता निभा रहे हैं और जमीनी निरीक्षण नहीं किया जा रहा।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी वरिष्ठ अधिकारी ने इन अधूरे आवासों का भौतिक सत्यापन किया? स्थानीय स्तर पर इसका जवाब ‘ना’ में मिलता है।

अधूरे मकान, अधूरी उम्मीदें

सिर्फ वर्तमान सत्र ही नहीं, बल्कि पूर्व वर्षों में स्वीकृत कई मकान भी आज अधूरे पड़े हैं। कहीं दीवारें खड़ी हैं तो कहीं छत का निर्माण नहीं हुआ। लाभार्थी दूसरी और तीसरी किस्त के लिए पंचायत से लेकर जिला कार्यालय तक चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई ठोस समाधान नहीं मिल रहा।

जवाबदेही पर उठते सवाल

जब सरकारी योजनाएं समय पर पात्र लोगों तक नहीं पहुंच रही हैं, तो इसकी जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। वनांचल क्षेत्रों के ग्रामीण भले ही अपनी समस्याओं को मुखर रूप से न रख पा रहे हों, लेकिन उनकी स्थिति गंभीर है।

प्रधानमंत्री की इस महत्वाकांक्षी योजना का कोरिया जिले में इस तरह ठप पड़ना सीधे तौर पर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिम्मेदार अधिकारी इस स्थिति को सुधारने के लिए क्या कदम उठाते हैं।