मीडिया से बातचीत के दौरान संजीत चौबे ने उन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें उनके और अरुण अग्रवाल के पार्टी से निष्कासन की बात कही जा रही थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो उन्हें और न ही अरुण अग्रवाल को कांग्रेस से निकाला गया है। उनके अनुसार, यह पूरी तरह भ्रामक प्रचार है, जिसे कुछ लोग जानबूझकर फैला रहे हैं।
चौबे ने आरोप लगाया कि पार्टी के ही कुछ लोग निजी स्वार्थ और अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के उद्देश्य से इस तरह की अफवाहें फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग खुद को पार्टी का हितैषी दिखाने के लिए षड्यंत्र रच रहे हैं, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस पार्टी एकजुट है और सभी कार्यकर्ता मिलकर संगठन को मजबूत करने में जुटे हुए हैं। “हम निष्कासित नहीं, बल्कि पूरी तरह एकजुट हैं। हमारा उद्देश्य केवल कांग्रेस पार्टी को मजबूत करना है,” चौबे ने कहा।
विवादों को पीछे छोड़ते हुए संजीत चौबे ने भविष्य की रणनीति भी साझा की। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में पार्टी के सभी नेता और कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर सक्रिय होकर जनता के बीच जाएंगे। वे पार्टी की विचारधारा को मजबूत करेंगे और विरोधियों के मंसूबों को नाकाम करने का प्रयास करेंगे।
उनके इस बयान के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा देखने को मिल रही है। इस्तीफों और निष्कासन की खबरों से जो भ्रम की स्थिति बनी हुई थी, वह अब काफी हद तक साफ होती नजर आ रही है। चौबे के बयान ने कार्यकर्ताओं को यह संदेश दिया है कि पार्टी में सब कुछ सामान्य है और संगठन मजबूती की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयान पार्टी के अंदर चल रही असहमति को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बयान के बाद वास्तव में पार्टी के भीतर की खींचतान खत्म होती है या फिर आने वाले दिनों में कोई नया मोड़ सामने आता है।
फिलहाल, संजीत चौबे के इस बयान ने बलरामपुर कांग्रेस की राजनीति में चल रही अटकलों पर विराम लगाने का काम जरूर किया है और एकजुटता का संदेश देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।