UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र शुक्ला, कोरिया | मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिला बने काफी समय बीत चुका है, लेकिन नगर पंचायत नई लेदरी के कार्यालय में आज भी ‘जिला-एमसीबी’ का नाम तक नहीं जोड़ा गया है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि नए जिले की पहचान के प्रति उदासीनता भी दर्शाती है।
साइन बोर्ड तक अपडेट नहीं
नगर पंचायत कार्यालय के साइन बोर्ड पर आज भी पुराने स्वरूप में ही जानकारी दर्ज है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) के पास यदि इस छोटे से बदलाव के लिए समय नहीं है, तो यह उनकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मरम्मत के नाम पर लाखों का खेल
चौंकाने वाली बात यह है कि कार्यालय के रंग-रोहण और मरम्मत के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। कागजों में भले ही कार्यालय ‘अपडेट’ दिखाया जा रहा हो, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल उलट है।
जनता का सवाल है कि जब इतना बजट खर्च हो रहा है, तो कार्यालय की हालत क्यों नहीं सुधर रही? आखिर यह पैसा कहां जा रहा है?
जवाबदेही पर उठते सवाल
CMO की कार्यप्रणाली को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या वे जिम्मेदारी से बच रहे हैं या फिर सिस्टम में कहीं न कहीं गंभीर खामी है। एक साधारण साइन बोर्ड को अपडेट न कर पाना प्रशासनिक क्षमता पर सवाल खड़ा करता है।
जांच की मांग तेज
स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि रंग-रोहण और मरम्मत के नाम पर निकाले गए बिलों की बारीकी से जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
जनता अब केवल कागजी विकास नहीं, बल्कि धरातल पर वास्तविक बदलाव चाहती है। ऐसे में जिला प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई करे।