UNSC में भारत की दावेदारी पर चीन-रूस का समर्थन, BRICS के दिल्ली घोषणापत्र से पाकिस्तान में बढ़ी बेचैनी
BRICS शिखर सम्मेलन के दिल्ली घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र और UNSC में व्यापक सुधार की जरूरत पर जोर दिया गया है। चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की बड़ी भूमिका की आकांक्षा के समर्थन को दोहराया है। इसे भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी के लिए अहम कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है। घोषणापत्र में विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ की भागीदारी बढ़ाने की बात भी कही गई है।
UNITED NEWS OF ASIA. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को लेकर BRICS शिखर सम्मेलन से महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत सामने आया है। नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान जारी दिल्ली घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की जरूरत पर जोर दिया गया। घोषणापत्र में विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ की भागीदारी बढ़ाने तथा वैश्विक संस्थाओं को मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप अधिक प्रतिनिधित्व वाला बनाने की बात कही गई है।
भारत के लिए इस घटनाक्रम की अहमियत इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि चीन और रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में शामिल हैं और दोनों के पास वीटो पावर है। BRICS के मंच से दोनों देशों की ओर से संयुक्त राष्ट्र में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका की आकांक्षा के समर्थन को दोहराया जाना भारत की कूटनीतिक कोशिशों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत लंबे समय से UNSC में स्थायी सदस्यता के लिए अपनी दावेदारी रखता आया है और सुरक्षा परिषद के ढांचे को अधिक प्रतिनिधित्व वाला बनाने की मांग करता रहा है।
दिल्ली घोषणापत्र में BRICS नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सुरक्षा परिषद को अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्व वाला, प्रभावी और मौजूदा वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। इस संदर्भ में विकासशील देशों को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक स्थान देने की मांग को भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी के लिए अहम माना जा रहा है।
घोषणापत्र में 2023 के जोहानिसबर्ग BRICS शिखर सम्मेलन में व्यक्त विचारों का भी संदर्भ दिया गया। चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र में भारत की बड़ी भूमिका की आकांक्षा के समर्थन को दोहराया। हालांकि UNSC में स्थायी सदस्यता का अंतिम फैसला व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति और संयुक्त राष्ट्र सुधार प्रक्रिया पर निर्भर करता है। इसलिए BRICS का समर्थन भारत के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और कूटनीतिक संकेत तो है, लेकिन इसे सदस्यता मिलने की अंतिम गारंटी के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच BRICS सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी भी चर्चा में रही। करीब सात साल बाद भारत पहुंचे शी जिनपिंग की प्रधानमंत्री मोदी के साथ मुलाकात और BRICS मंच पर चीन की भूमिका ने सम्मेलन को विशेष कूटनीतिक महत्व दिया। भारत-चीन संबंधों में सीमा विवाद और अन्य मतभेदों के बावजूद बहुपक्षीय मंचों पर दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं लगातार चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
पाकिस्तान के नजरिए से भी BRICS घोषणापत्र और भारत की UNSC दावेदारी को लेकर चीन के रुख पर नजर है। भारत की स्थायी सदस्यता की कोशिशों का चीन की ओर से समर्थन पाकिस्तान के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। वहीं नई दिल्ली घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा से जुड़े घटनाक्रम ने भी पाकिस्तान की चिंताओं को बढ़ाया है। कुल मिलाकर BRICS सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र सुधार, भारत की बड़ी भूमिका और ग्लोबल साउथ की बढ़ती भागीदारी का संदेश भारत की वैश्विक कूटनीतिक स्थिति के लिए अहम माना जा रहा है।