मुस्लिम देशों की एकजुटता पर ईरान का जोर, ‘इस्लामिक नाटो’ में शामिल होने की अटकलें तेज
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने मुस्लिम देशों से एकजुट होकर साझा मोर्चा बनाने की अपील की है। पाकिस्तान दौरे के दौरान दिए गए इस बयान के बाद ईरान के तथाकथित ‘इस्लामिक नाटो’ में शामिल होने की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। इसी कड़ी में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने मुस्लिम देशों से आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होने और साझा सहयोग तंत्र विकसित करने का आह्वान किया है। उनके इस बयान के बाद मुस्लिम देशों के संभावित सामूहिक सुरक्षा और सहयोग मंच को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पाकिस्तान दौरे के दौरान संयुक्त प्रेस वार्ता में राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने कहा कि मुस्लिम देशों को क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और विकास के लिए आपसी सहयोग बढ़ाना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ हुई बैठकों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय मुद्दों पर व्यापक चर्चा की है।
राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने कहा कि पश्चिम एशिया और फारस की खाड़ी क्षेत्र में स्थायी शांति तभी संभव है जब क्षेत्रीय देश आपसी सम्मान, संवाद और सहयोग की नीति अपनाएं। उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम देशों को साझा चुनौतियों का सामना करने के लिए एकजुट होकर कार्य करना चाहिए। उनके इस बयान को मुस्लिम देशों के बीच अधिक समन्वय और सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब क्षेत्रीय सुरक्षा और राजनीतिक संतुलन को लेकर कई चुनौतियां मौजूद हैं। पाकिस्तान और सऊदी अरब के नेतृत्व में मुस्लिम देशों के सहयोग को मजबूत करने के प्रयास पहले से जारी हैं। ऐसे में ईरान का सकारात्मक रुख क्षेत्रीय कूटनीति में नए आयाम जोड़ सकता है।
हालांकि, किसी औपचारिक सैन्य या सुरक्षा गठबंधन में ईरान के शामिल होने को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। वर्तमान में यह चर्चा राजनीतिक विश्लेषण और कूटनीतिक संकेतों के आधार पर की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि मुस्लिम देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में किसी भी पहल को कई राजनीतिक, रणनीतिक और क्षेत्रीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
स्विट्जरलैंड में महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठकों के बाद पाकिस्तान पहुंचे राष्ट्रपति पेजेश्कियान का यह दौरा दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान व्यापार, सुरक्षा, ऊर्जा और क्षेत्रीय स्थिरता सहित कई विषयों पर चर्चा हुई।
मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया की बदलती परिस्थितियों के बीच ईरान की यह पहल आने वाले समय में क्षेत्रीय राजनीति और मुस्लिम देशों के आपसी संबंधों पर प्रभाव डाल सकती है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर है कि मुस्लिम देशों के बीच सहयोग और एकजुटता को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।