मेडिकल कॉलेज के हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग का नया कीर्तिमान, 20 दिनों में 9 फेफड़ों की लोबेक्टॉमी सर्जरी

रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय के हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने फेफड़ों की जटिल सर्जरी के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। विभाग ने केवल 20 दिनों में 9 लोबेक्टॉमी सर्जरी सफलतापूर्वक की हैं, जिससे पिछले दो महीनों में कुल 13 लोबेक्टॉमी सर्जरी हो चुकी हैं। इन मरीजों की उम्र 15 से 70 वर्ष के बीच रही। इनमें 15 वर्षीय मरीज भी शामिल है, जिसके बाएं फेफड़े के ऊपरी हिस्से में एस्परजिलोमा फंगल संक्रमण था। यह विभाग में अब तक लोबेक्टॉमी कराने वाला सबसे कम उम्र का मरीज है। दो मरीजों की आपातकालीन सर्जरी अत्यधिक रक्तस्राव के कारण की गई। सभी ऑपरेशन आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क किए गए।

Aug 10, 2026 - 13:32
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मेडिकल कॉलेज के हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग का नया कीर्तिमान, 20 दिनों में 9 फेफड़ों की लोबेक्टॉमी सर्जरी

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर के हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने फेफड़ों की जटिल सर्जरी के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। विभाग ने महज 20 दिनों में फेफड़े की 9 लोबेक्टॉमी सर्जरी सफलतापूर्वक की हैं। इन सर्जरियों को मिलाकर पिछले दो महीनों में विभाग द्वारा कुल 13 लोबेक्टॉमी सर्जरी की जा चुकी हैं।

इन सर्जरियों में 15 वर्ष के बच्चे से लेकर 70 वर्ष तक के मरीज शामिल रहे। 15 वर्षीय मरीज के बाएं फेफड़े के ऊपरी लोब में एस्परजिलोमा नामक फंगल संक्रमण पाया गया था। विभाग के अनुसार, यह अब तक का सबसे कम उम्र का मरीज है, जिसकी यहां लोबेक्टॉमी सर्जरी की गई है।

हाल ही में किए गए ऑपरेशनों में दो मरीज ऐसे भी थे, जिन्हें खांसी के साथ अत्यधिक रक्तस्राव यानी हेमोप्टाइसिस की समस्या थी। इन मरीजों की आपातकालीन स्थिति में सर्जरी की गई। आधुनिक तकनीक और एडवांस्ड लंग स्टेपलर की सहायता से की गई इन जटिल सर्जरियों के बाद मरीजों की स्थिति में सुधार हुआ।

हार्ट-चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू के अनुसार, लोबेक्टॉमी एक जटिल सर्जरी है, जिसमें बीमारी से प्रभावित फेफड़े के एक हिस्से यानी लोब को ऑपरेशन के माध्यम से निकाल दिया जाता है। विभाग में इस प्रक्रिया के लिए आधुनिक तकनीक और एडवांस्ड लंग स्टेपलर का इस्तेमाल किया जाता है। इससे ऑपरेशन के बाद होने वाली कुछ जटिलताओं, विशेषकर ब्रोन्कोप्लूरल फिस्टुला की संभावना को कम करने में मदद मिलती है।

छत्तीसगढ़ में फेफड़े की लोबेक्टॉमी के प्रमुख कारणों में एस्परजिलोमा और ब्रोन्किएक्टैसिस शामिल हैं। एस्परजिलोमा फेफड़े में होने वाला फंगल संक्रमण है, जो कई बार पहले से क्षतिग्रस्त या टीबी से प्रभावित फेफड़े में विकसित हो सकता है। वहीं ब्रोन्किएक्टैसिस में फेफड़े की वायुमार्ग संरचना प्रभावित होती है और संक्रमण के कारण मरीज को लंबे समय तक खांसी तथा कई मामलों में खांसी के साथ खून आने की समस्या हो सकती है।

फेफड़े के ट्यूमर, लंग एब्सिस और कुछ वैस्कुलर मालफॉर्मेशन भी खून आने के कारण हो सकते हैं। प्रारंभिक अवस्था में पाए गए कुछ फेफड़े के कैंसर में बीमारी से प्रभावित लोब को निकालने के लिए लोबेक्टॉमी एक उपचार विकल्प हो सकता है। उपचार का निर्णय मरीज की बीमारी और चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर विशेषज्ञ करते हैं।

अंबेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में फेफड़ों से संबंधित कई प्रकार की जटिल सर्जरी की जाती हैं। इनमें डिकॉर्टिकेशन, लोबेक्टॉमी, सेगमेंटेक्टॉमी और न्यूमोनेक्टॉमी जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। न्यूमोनेक्टॉमी में बीमारी से प्रभावित एक पूरे फेफड़े को निकालना पड़ सकता है।

विभाग में सामान्यतः हर वर्ष करीब 15 से 20 लोबेक्टॉमी सर्जरी की जाती हैं। यहां छत्तीसगढ़ के अलावा बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों से भी मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं।

अस्पताल के अनुसार, ये सभी ऑपरेशन आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क किए जाते हैं। वर्तमान में भी विभाग में लोबेक्टॉमी सर्जरी के लिए कुछ मरीज प्रतीक्षारत हैं।

क्या होती है लोबेक्टॉमी सर्जरी?

मानव शरीर में दायां और बायां फेफड़ा होता है। बायां फेफड़ा दो लोब—अपर और लोअर—से बना होता है, जबकि दायां फेफड़ा तीन लोब—अपर, मिडिल और लोअर—से मिलकर बना होता है। जब एस्परजिलोमा, ब्रोन्किएक्टैसिस या लंग ट्यूमर जैसी बीमारी फेफड़े के किसी एक लोब तक सीमित रहती है, तो बीमारी से प्रभावित उस हिस्से को सर्जरी के जरिए निकालने की प्रक्रिया को लोबेक्टॉमी कहा जाता है।

सर्जरी के दौरान प्रभावित लोब को फेफड़े के स्वस्थ हिस्सों से अलग कर विशेष तकनीक और लंग स्टेपलर की सहायता से निकाला जाता है। सामान्यतः ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति के अनुसार करीब 6 से 8 दिनों में उसे अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है।