मरीज की मौत पर उठे सवालों के बीच शिवाय हॉस्पिटल ने रखा इलाज का पूरा ब्यौरा, ICU से वेंटिलेटर तक बचाने का किया प्रयास

कोरबा के शिवाय हॉस्पिटल में 62 वर्षीय सविता जायसवाल की मौत के बाद परिजनों की ओर से उपचार में कथित लापरवाही समेत कई आरोप लगाए गए। अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को निराधार बताते हुए मरीज के इलाज का पूरा घटनाक्रम सामने रखा है। प्रबंधन के अनुसार, अस्पताल पहुंचने के समय महिला की हालत बेहद गंभीर थी। उन्हें सांस लेने में परेशानी, कम ऑक्सीजन स्तर और निम्न ब्लड प्रेशर की स्थिति में तत्काल ICU में भर्ती किया गया। पहले NIV सपोर्ट दिया गया और हालत बिगड़ने पर वेंटिलेटर तथा एडवांस लाइफ सपोर्ट उपलब्ध कराया गया। अस्पताल ने कोरे कागज पर हस्ताक्षर कराने, बिना लाइसेंस संचालन, योग्य डॉक्टरों की कमी और आवश्यक सुविधाएं नहीं होने के आरोपों को भी खारिज किया है।

Aug 10, 2026 - 13:35
 0  2
मरीज की मौत पर उठे सवालों के बीच शिवाय हॉस्पिटल ने रखा इलाज का पूरा ब्यौरा, ICU से वेंटिलेटर तक बचाने का किया प्रयास

UNITED NEWS OF ASIA. राहुल गुप्ता, कोरबा l  शहर के शिवाय हॉस्पिटल में 62 वर्षीय सविता जायसवाल की मौत के बाद उपचार को लेकर उठे सवालों के बीच अस्पताल प्रबंधन ने अपना पक्ष सामने रखा है। परिजनों की ओर से इलाज में कथित लापरवाही सहित कई आरोप लगाए जाने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों को निराधार बताया है। प्रबंधन का कहना है कि मरीज को अस्पताल लाए जाने के समय ही उनकी स्थिति बेहद गंभीर थी और चिकित्सकों ने उपलब्ध चिकित्सा संसाधनों के माध्यम से उन्हें बचाने का हरसंभव प्रयास किया।

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, मरीज को अस्पताल लाए जाने के समय सांस लेने में गंभीर परेशानी थी। उनका ऑक्सीजन स्तर और ब्लड प्रेशर काफी कम था। गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल ICU में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। चिकित्सकों और मेडिकल स्टाफ की टीम ने उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी।

हालत बिगड़ने पर NIV से वेंटिलेटर तक उपचार

प्रबंधन के मुताबिक, मरीज को शुरुआत में NIV सपोर्ट दिया गया। इसके बावजूद स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ और उनकी स्थिति और गंभीर होने लगी। इसके बाद चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। अस्पताल का कहना है कि मरीज को एडवांस लाइफ सपोर्ट भी उपलब्ध कराया गया और ICU में लगातार मॉनिटरिंग की जाती रही।

अस्पताल के अनुसार, उपचार के दौरान यदि मरीज बेचैन होती थीं या ऑक्सीजन सपोर्ट हटाने जैसी स्थिति उत्पन्न होती थी, तो मेडिकल स्टाफ तत्काल हस्तक्षेप करता था। चिकित्सकों की टीम ने गंभीर स्थिति के बावजूद मरीज को बचाने के लिए लगातार उपचार और निगरानी जारी रखी।

अस्पताल ने कहा- एक-एक पल बचाने का प्रयास किया

शिवाय हॉस्पिटल प्रबंधन का कहना है कि गंभीर मरीज के उपचार में अस्पताल पहुंचने के समय उनकी चिकित्सकीय स्थिति महत्वपूर्ण होती है। प्रबंधन के अनुसार, सविता जायसवाल की हालत अस्पताल पहुंचने से पहले ही काफी नाजुक थी। ICU में भर्ती करने के बाद उनकी स्थिति की लगातार निगरानी की गई और जरूरत के अनुसार ऑक्सीजन सपोर्ट, NIV, वेंटिलेटर और अन्य एडवांस लाइफ सपोर्ट उपलब्ध कराया गया।

हालांकि, तमाम चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद मरीज की जान नहीं बचाई जा सकी।

कोरे कागज पर हस्ताक्षर के आरोप से इनकार

मामले में परिजनों द्वारा कोरे कागज पर हस्ताक्षर कराने के लगाए गए आरोप को भी अस्पताल प्रबंधन ने खारिज किया है। प्रबंधन का कहना है कि गंभीर मरीज के उपचार से पहले परिजनों को मरीज की स्थिति, उपचार की आवश्यकता और संभावित जोखिमों की जानकारी दी जाती है। इसके बाद नियमानुसार Informed Consent लिया जाता है।

अस्पताल का कहना है कि इस प्रक्रिया को कोरे कागज पर हस्ताक्षर कराने के आरोप के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं है।

लाइसेंस और चिकित्सा सुविधाओं पर भी सफाई

अस्पताल के संचालन को लेकर लगाए गए बिना लाइसेंस, योग्य चिकित्सकों की कमी और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के आरोपों पर भी प्रबंधन ने सफाई दी है। अस्पताल के अनुसार, वहां आवश्यक अनुमतियां, प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ, विशेषज्ञ चिकित्सक और जरूरी चिकित्सा उपकरण उपलब्ध हैं।

प्रबंधन का दावा है कि सविता जायसवाल के उपचार के दौरान उपलब्ध संसाधनों और निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया के अनुसार उपचार किया गया।

अस्पताल ने लापरवाही के आरोप को नकारा

शिवाय हॉस्पिटल प्रबंधन ने कहा कि किसी मरीज की मौत परिवार के लिए बेहद दुखद घटना होती है और अस्पताल इस पीड़ा को समझता है। हालांकि, प्रबंधन ने मरीज की मौत के लिए अस्पताल की उपचार प्रक्रिया को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराने से इनकार किया है।

अस्पताल के अनुसार, मरीज की हालत पहले से गंभीर थी और उन्हें बचाने के लिए ICU, NIV सपोर्ट, वेंटिलेटर तथा एडवांस लाइफ सपोर्ट समेत उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं का इस्तेमाल किया गया। प्रबंधन ने कहा कि चिकित्सकीय टीम ने उपचार के दौरान मरीज को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया।