पुलिस ने बताया कि इंटरनेट, ऑनलाइन बैंकिंग, UPI, सोशल मीडिया, ऑनलाइन खरीदारी, नौकरी, शिक्षा और अन्य डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराध का खतरा भी बढ़ा है। साइबर अपराधी लोगों की छोटी-सी चूक का फायदा उठाकर उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाने या उनकी गोपनीय डिजिटल जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं।
पुलिस के अनुसार साइबर अपराध में मोबाइल, इंटरनेट, सोशल मीडिया, ऑनलाइन बैंकिंग या किसी अन्य डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी करना, गोपनीय जानकारी हासिल करना, पैसे की ठगी करना या डिजिटल खाते का दुरुपयोग करना शामिल हो सकता है।
साइबर ठग अक्सर बैंक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, रिश्तेदार, कस्टमर केयर कर्मचारी, सरकारी अधिकारी या किसी प्रतिष्ठित संस्था के प्रतिनिधि बनकर लोगों से संपर्क करते हैं। इसके अलावा फर्जी लिंक, वेबसाइट, सोशल मीडिया प्रोफाइल, नौकरी, निवेश और अन्य आकर्षक प्रस्तावों का सहारा लेकर भी लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश की जाती है।
पुलिस ने बताया कि ठग लोगों पर जल्दबाजी में निर्णय लेने का दबाव बनाते हैं। “अभी पैसे भेजिए”, “OTP बताइए”, “लिंक खोलिए” या “खाता बंद हो जाएगा” जैसे संदेशों के जरिए डर या दबाव पैदा किया जाता है। नागरिकों को सलाह दी गई कि OTP, ATM PIN, UPI PIN, CVV, पासवर्ड और अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि UPI PIN पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं होता। किसी रिफंड, पुरस्कार या भुगतान के नाम पर UPI PIN डालने को कहा जाए तो सावधान रहने की जरूरत है। संदिग्ध KYC, बैंक खाते, बिजली बिल, पार्सल, नौकरी, लोन या पुरस्कार से जुड़े लिंक पर क्लिक करने से पहले उनकी सत्यता की जांच करने की अपील की गई।
सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल, संदिग्ध वीडियो कॉल, पैसे की मांग और निजी तस्वीरों के नाम पर ब्लैकमेल जैसी घटनाओं से भी सतर्क रहने को कहा गया। अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस एप डाउनलोड नहीं करने की सलाह दी गई।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी को लेकर भी पुलिस ने नागरिकों को जागरूक किया। पुलिस के अनुसार यदि कोई व्यक्ति पुलिस, CBI, ED, TRAI या किसी अन्य सरकारी विभाग का अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी देकर पैसे जमा कराने का दबाव बनाए, तो घबराने के बजाय कॉल समाप्त कर संबंधित विभाग या स्थानीय पुलिस से आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करना चाहिए।
साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर कॉल करने और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई। साथ ही बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को तुरंत सूचना देने तथा Transaction ID/UTR, मोबाइल नंबर, स्क्रीनशॉट, चैट और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखने की सलाह दी गई।
कबीरधाम पुलिस ने नागरिकों से स्वयं जागरूक रहने के साथ परिवार के बच्चों और बुजुर्गों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की अपील की। पुलिस का संदेश है कि साइबर ठगी से बचने के लिए अनजान कॉल, संदेश, लिंक या पैसे की मांग पर तुरंत भरोसा न करें, बल्कि रुकें, सोचें, जांचें और फिर कार्रवाई करें। अभियान 02 अक्टूबर 2026 को समापन दिवस पर पहुंचेगा।