रक्षाबंधन प्रेम, विश्वास और रक्षा के संकल्प का पावन पर्व : विधायक पुरन्दर मिश्रा
विधायक पुरन्दर मिश्रा ने रक्षाबंधन को भारतीय संस्कृति में प्रेम, विश्वास, सम्मान और रक्षा के संकल्प का पावन पर्व बताते हुए प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। 27 अगस्त को 2100 माताओं-बहनों की उपस्थिति में भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी जी को रक्षा-सूत्र अर्पित करने का धार्मिक आयोजन किया जाएगा।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के पवित्र प्रेम, विश्वास, सम्मान और एक-दूसरे के प्रति समर्पण का अनुपम पर्व है। उत्तर विधानसभा क्षेत्र के विधायक पुरन्दर मिश्रा ने रक्षाबंधन की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व केवल कलाई पर राखी बांधने तक सीमित नहीं है, बल्कि रिश्तों की गरिमा, पारिवारिक संस्कारों, सामाजिक सद्भाव और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देता है।
पुरन्दर मिश्रा ने कहा कि रक्षा-सूत्र भारतीय सनातन परंपरा में प्रेम, मंगलकामना, सुरक्षा और संकल्प का प्रतीक रहा है। समय के साथ रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह और अटूट विश्वास का पर्व बनकर जनमानस में विशेष स्थान बना चुका है। यह पर्व हमें सिखाता है कि रिश्ते केवल अधिकारों से नहीं, बल्कि प्रेम, सम्मान, कर्तव्य, विश्वास और एक-दूसरे के साथ खड़े रहने की भावना से मजबूत होते हैं।
रक्षाबंधन से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी का प्रसंग विशेष रूप से स्मरण किया जाता है। लोकमान्यता के अनुसार द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण की उंगली पर अपने वस्त्र का टुकड़ा बांधा था और उनके इस स्नेह से प्रभावित होकर श्रीकृष्ण ने उनकी रक्षा का संकल्प लिया। यह प्रसंग निस्वार्थ प्रेम, विश्वास और संकट की घड़ी में अपनों के साथ खड़े रहने की भावना का प्रतीक माना जाता है।
रक्षा-सूत्र की प्राचीन परंपरा को इंद्र और इंद्राणी की कथा से भी जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवासुर संग्राम के दौरान इंद्राणी ने इंद्र की कलाई पर पवित्र रक्षा-सूत्र बांधा था। इसे संकट से रक्षा, मंगलकामना और विजय के संकल्प के रूप में देखा जाता है। वहीं भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और राजा बलि की कथा भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, सम्मान और वचन की महत्ता को रेखांकित करती है।
विधायक ने कहा कि सनातन परंपरा में रक्षा-सूत्र का महत्व केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं रहा है। धार्मिक और सामाजिक अवसरों पर गुरु, पुरोहित तथा परिवार के बड़े सदस्य भी मंगलकामना और आशीर्वाद के प्रतीक के रूप में रक्षा-सूत्र बांधते रहे हैं। आज के समय में रक्षाबंधन का संदेश और भी प्रासंगिक है। यह भाई और बहन दोनों को एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनने, सम्मान की रक्षा करने और परिवार को प्रेम एवं विश्वास के सूत्र में बांधे रखने की प्रेरणा देता है।
रक्षाबंधन के पावन अवसर पर 27 अगस्त को सुबह 11 बजे से 2100 माताओं एवं बहनों की उपस्थिति में भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी जी को पवित्र रक्षा-सूत्र अर्पित करने का भव्य धार्मिक आयोजन किया जाएगा। माताएं एवं बहनें श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी जी को रक्षा-सूत्र अर्पित कर प्रदेश और क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि, सद्भाव एवं जनकल्याण की मंगलकामना करेंगी।
पुरन्दर मिश्रा ने कहा कि यह आयोजन सनातन परंपरा, धार्मिक आस्था और मातृशक्ति के सम्मान का सुंदर संगम होगा। 2100 माताओं-बहनों की सामूहिक सहभागिता आयोजन को विशेष आध्यात्मिक और सामाजिक स्वरूप प्रदान करेगी। उन्होंने प्रदेशवासियों एवं उत्तर विधानसभा क्षेत्र के नागरिकों को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी जी से सभी परिवारों में सुख, शांति, समृद्धि और आपसी प्रेम बनाए रखने की कामना की।
उन्होंने कहा कि राखी का पवित्र धागा केवल कलाई पर नहीं, बल्कि दिलों में प्रेम, विश्वास, सम्मान और रिश्तों की मजबूती का बंधन बांधता है। रक्षाबंधन हमारी सनातन संस्कृति की उस महान परंपरा का पर्व है, जो हमें अपनों के साथ खड़े रहने, रिश्तों की गरिमा बनाए रखने और समाज में प्रेम एवं सद्भाव को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।