कार्यक्रम की शुरुआत परिचय गतिविधि के साथ हुई, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने बचपन की यादों और अनुभवों को साझा किया। इस गतिविधि ने क्रिएटर्स को अपने बचपन के अनुभवों को आज के बच्चों की परिस्थितियों, आकांक्षाओं और चुनौतियों से जोड़कर देखने का अवसर दिया। इसके बाद संवाद को बच्चों से जुड़े महत्वपूर्ण सामाजिक और स्वास्थ्य विषयों की ओर आगे बढ़ाया गया।
यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट अनिल गुलाटी और हेल्थ स्पेशलिस्ट डॉ. गजेंद्र सिंह ने प्रतिभागियों को समाज के चेंजमेकर्स के रूप में संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया क्रिएटर्स अपनी रचनात्मकता और व्यापक डिजिटल पहुंच के माध्यम से बच्चों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को समाज के बड़े वर्ग तक पहुंचाने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।
अनिल गुलाटी ने संवाद का संचालन करते हुए कहा कि रायपुर और पूरे छत्तीसगढ़ में बच्चों से जुड़े विषयों पर व्यापक और सार्थक विमर्श विकसित करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने क्रिएटर्स से बच्चों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों की पहचान करने और सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यूनिसेफ तकनीकी जानकारी और विश्वसनीय तथ्यों के माध्यम से क्रिएटर्स को सहयोग कर सकता है, जिससे प्रमाण आधारित जानकारी को प्रभावी डिजिटल कंटेंट में बदला जा सके।
डॉ. गजेंद्र सिंह ने बाल स्वास्थ्य, शिशु मृत्यु दर और मानसिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि बच्चों के स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण से जुड़े मुद्दों का उनके विकास और भविष्य पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने इन विषयों पर समाज में जागरूकता बढ़ाने और तथ्यपरक संवाद को मजबूत करने की जरूरत बताई।
यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के हेल्थ ऑफिसर श्वेताभ त्रिपाठी ने भी अपने बचपन की कुछ यादें साझा कीं। वहीं वरिष्ठ पत्रकार डी. श्याम कुमार ने अपने मैदानी अनुभवों के माध्यम से प्रतिभागियों को जमीनी स्तर के मुद्दों को समझने और उन्हें संवेदनशीलता एवं प्रामाणिकता के साथ प्रस्तुत करने के महत्व से अवगत कराया।
मीडिया प्रोफेशनल सना तमकीन ने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा करते हुए कहा कि कंटेंट क्रिएटर्स समाज की सोच और व्यवहार को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने क्रिएटर्स से अपने डिजिटल प्रभाव का जिम्मेदारीपूर्वक इस्तेमाल करने और बच्चों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से सामने लाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में प्रिया लालवानी, आरजे अनिमेष, स्वाति खंडेलवाल, अंजनी गांगुली, स्पर्श लखानी, तशीष उपाध्याय, प्रियांशु सिंह, देवेश बजाज, रूबल सिंह, सत्यम यदु, अंकित दुबे, राहुल गुप्ता और प्रवीण त्रिपाठी सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े क्रिएटर्स शामिल हुए।
कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने बच्चों के अधिकारों, जरूरतों और कल्याण से जुड़े मुद्दों को अपनी रचनात्मक आवाज और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से समाज तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता जताई। ‘क्रिएटिव वॉयसेज: ए मीटअप’ का उद्देश्य ऐसे क्रिएटर्स का समुदाय तैयार करना है, जो रचनात्मकता, डिजिटल प्रभाव और विश्वसनीय जानकारी के माध्यम से छत्तीसगढ़ के बच्चों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को व्यापक समाज तक पहुंचाने में योगदान दे सकें।