एक लाख के कैंसर इंजेक्शन में निकला सिर्फ पानी, 9 करोड़ के कथित रैकेट का खुलासा, 17 गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने करीब 9 करोड़ रुपये के कथित नकली कैंसर दवा रैकेट का खुलासा करने का दावा किया है। जांच में करीब एक लाख रुपये में बेचे जा रहे एवालुमैब इंजेक्शन के सैंपल में कैंसर के इलाज के लिए जरूरी मूल तत्व नहीं मिलने की बात सामने आई है। पुलिस ने सात राज्यों में फैले कथित नेटवर्क से जुड़े 17 लोगों को गिरफ्तार किया है और बड़ी संख्या में एंटी-कैंसर दवाएं, खाली वायल, पैकेजिंग सामग्री और नकदी बरामद की है।
UNITED NEWS OF ASIA. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कैंसर की नकली दवाओं की कथित कालाबाजारी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक, इस कथित रैकेट का नेटवर्क करीब 9 करोड़ रुपये का था और यह सात राज्यों तक फैला हुआ था। मामले में 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच के दौरान बड़ी मात्रा में एंटी-कैंसर दवाएं, खाली वायल, पैकेजिंग सामग्री और नकदी बरामद की गई है।
पुलिस के अनुसार, इस मामले में करीब एक लाख रुपये में मरीजों को बेचे जा रहे एवालुमैब इंजेक्शन के सैंपल की जांच कराई गई। दवा कंपनी के माध्यम से इन सैंपल को जर्मनी की मर्क लैब में जांच के लिए भेजे जाने की बात कही गई है। जांच में कथित तौर पर कैंसर के इलाज के लिए जरूरी मूल इंग्रीडिएंट की मात्रा शून्य पाई गई। पुलिस का दावा है कि संबंधित इंजेक्शन में सिर्फ पानी होने की बात जांच में सामने आई है। इस खुलासे के बाद उन मरीजों की चिंता बढ़ गई है, जिन्होंने कथित तौर पर ब्लैक मार्केट से महंगी दवाएं खरीदी थीं।
क्राइम ब्रांच के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे से 588 भरे हुए एंटी-कैंसर वायल, छह खाली वायल और सात खाली दवा के बॉक्स बरामद किए गए हैं। इसके अलावा दूसरी दवाओं की 3,021 यूनिट और करीब 50 लाख रुपये नकद जब्त किए गए। बरामद दवाओं में डार्जालेक्स, इमफिंजी, एरबिटक्स, ऑपडाइटा, गाजीवा, बावेन्सियो, एडसेट्रिस और कीट्रूडा जैसी महंगी कैंसर दवाएं शामिल हैं।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि कथित नेटवर्क में नकली दवाओं के अलावा अस्पतालों और सरकारी संस्थानों से बाहर निकाली गई दवाओं की भी कथित सप्लाई की जाती थी। पुलिस इस एंगल की भी जांच कर रही है कि राजस्थान सरकार की योजना के तहत कैंसर मरीजों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली दवाएं कथित तौर पर सप्लाई चेन से निकलकर ब्लैक मार्केट तक कैसे पहुंचीं।
जांच के दौरान दिल्ली, नवी मुंबई और अन्य स्थानों पर छापेमारी की गई। पुलिस के मुताबिक, नेटवर्क से जुड़े लोग बिना वैध बिल, खरीद रिकॉर्ड, ड्रग लाइसेंस और जरूरी दस्तावेजों के दवाओं को अलग-अलग ठिकानों पर रखते और आगे सप्लाई करते थे। कथित तौर पर असली दवाओं के कार्टन और खाली बॉक्स का इस्तेमाल रीपैकिंग के लिए किया जाता था।
क्राइम ब्रांच के अनुसार, पैकेजिंग में बदलाव के लिए बैच नंबर, MRP और पहचान से जुड़ी जानकारी मिटाने के बाद दवाओं को दोबारा पैक किया जाता था। जांच एजेंसी को कथित लेनदेन से जुड़े रजिस्टर और डायरी भी मिली हैं। पुलिस अब इन दस्तावेजों के आधार पर पूरे नेटवर्क, दवाओं के स्रोत और पैसों के लेनदेन की जानकारी जुटा रही है।
पुलिस के मुताबिक, कथित सिंडिकेट का नेटवर्क दिल्ली-NCR के अलावा नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद, झज्जर, मुंबई और हैदराबाद तक फैला था। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि नकली और संदिग्ध दवाएं किन रास्तों से मरीजों तक पहुंचीं और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।