नवपदस्थ कलेक्टर तुलिका प्रजापति का बैगा महिला श्रीबाई ने पारंपरिक बीरन माला पहनाकर किया आत्मीय स्वागत

कवर्धा की नवपदस्थ कलेक्टर तुलिका प्रजापति से ग्राम पंचायत बांटीपथरा के आश्रित ग्राम छिंदपुर निवासी बैगा महिला श्रीबाई ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अपने हाथों से तैयार दुर्लभ घास से बनी पारंपरिक बीरन माला पहनाकर कलेक्टर का आत्मीय स्वागत किया। कलेक्टर ने महिला की हस्तकला और स्थानीय परंपरा की सराहना करते हुए ऐसी कलाओं के संरक्षण और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर जोर दिया।

Aug 26, 2026 - 14:02
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नवपदस्थ कलेक्टर तुलिका प्रजापति का बैगा महिला श्रीबाई ने पारंपरिक बीरन माला पहनाकर किया आत्मीय स्वागत

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा की नवपदस्थ कलेक्टर तुलिका प्रजापति से ग्राम पंचायत बांटीपथरा के आश्रित ग्राम छिंदपुर निवासी बैगा महिला श्रीबाई ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अपने हाथों से तैयार की गई दुर्लभ घास से निर्मित पारंपरिक बीरन माला पहनाकर कलेक्टर का आत्मीय स्वागत किया। ग्रामीण और आदिवासी परंपरा से जुड़ी इस खास माला के माध्यम से श्रीबाई ने अपनी संस्कृति, सादगी और हस्तकला की सुंदर झलक प्रस्तुत की।

श्रीबाई बैगा ने पूरी आत्मीयता के साथ कलेक्टर तुलिका प्रजापति को अपने हाथों से तैयार की गई बीरन माला भेंट की। पारंपरिक परिवेश से आई महिला के इस सहज और स्नेहपूर्ण स्वागत से कलेक्टर भाव-विभोर हो गईं। उन्होंने श्रीबाई के आत्मीय सम्मान के लिए उनका आभार व्यक्त किया और उनके द्वारा तैयार की गई बीरन माला की सराहना की।

बीरन माला जैसी पारंपरिक हस्तकलाएं छत्तीसगढ़ की ग्रामीण और आदिवासी संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। प्राकृतिक संसाधनों से तैयार होने वाली ऐसी वस्तुओं में स्थानीय जीवनशैली, परंपरा और पीढ़ियों से चली आ रही कला की झलक देखने को मिलती है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं के लिए इस तरह की हस्तकला अपनी प्रतिभा को पहचान दिलाने के साथ आर्थिक अवसर का माध्यम भी बन सकती है।

कलेक्टर तुलिका प्रजापति ने कहा कि स्थानीय परंपराओं, लोककला और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी हस्तकलाएं हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके संरक्षण और प्रोत्साहन की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ियों तक इन पारंपरिक कलाओं को पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों की महिलाओं के हुनर को उचित मंच और बाजार उपलब्ध कराया जाए तो वे अपनी कला को आगे बढ़ाने के साथ आय का बेहतर साधन भी विकसित कर सकती हैं।

श्रीबाई द्वारा तैयार की गई बीरन माला का यह स्वागत केवल औपचारिक मुलाकात तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने स्थानीय संस्कृति और महिला हुनर को सम्मान देने का संदेश भी दिया। प्राकृतिक सामग्री से तैयार पारंपरिक वस्तुओं को प्रोत्साहन मिलने से ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

कवर्धा जिले में स्थानीय परंपराओं और ग्रामीण जीवन से जुड़ी ऐसी कलाओं को बढ़ावा देने से आदिवासी एवं वनांचल क्षेत्रों की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में मदद मिलेगी। कलेक्टर तुलिका प्रजापति ने श्रीबाई के इस प्रयास की सराहना कर स्थानीय महिलाओं के हुनर और पारंपरिक हस्तकला के महत्व को रेखांकित किया।