विष्णु भइया के सहयोग से दुर्गा बनीं लखपति दीदी, पशुपालन और मछली पालन से संवारा परिवार का भविष्य

कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड की ग्राम पंचायत पोंडी निवासी दुर्गा नट ने मेहनत और शासन की योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आजीविका को मजबूत किया है। सुअर, मुर्गी, बकरी और मछली पालन से उनकी वार्षिक आय करीब 2.50 लाख रुपये तक पहुंच गई है। बिहान से जुड़ने और विभिन्न विभागों से मिले सहयोग के बाद दुर्गा लखपति दीदी बनकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।

Aug 26, 2026 - 14:12
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विष्णु भइया के सहयोग से दुर्गा बनीं लखपति दीदी, पशुपालन और मछली पालन से संवारा परिवार का भविष्य

UNITED NEWS OF ASIA. कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड की ग्राम पंचायत पोंडी निवासी दुर्गा नट ने अपनी मेहनत, आत्मविश्वास और शासन की योजनाओं का लाभ उठाकर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। कभी सीमित संसाधनों के साथ सुअर पालन करने वाली दुर्गा आज मुर्गी, बकरी, सुअर और मछली पालन जैसी विभिन्न गतिविधियों से जुड़कर अपनी आय बढ़ा रही हैं। इन आजीविका गतिविधियों से उनकी वार्षिक आय करीब 2.50 लाख रुपये तक पहुंच गई है और अब वे लखपति दीदी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।

दुर्गा नट बताती हैं कि पहले परिवार की आमदनी के साधन सीमित थे। सुअर पालन से होने वाली आय से ही परिवार की जरूरतें पूरी करनी पड़ती थीं। ऐसे समय में बिहान से जुड़ने और शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलने से उन्हें अपनी आजीविका को विस्तार देने का अवसर मिला। पशुधन विभाग की ओर से उन्हें तीन सुअर और मुर्गी पालन के लिए 45 चूजे उपलब्ध कराए गए। इसके साथ ही मत्स्य विभाग से आइस बॉक्स सहित मछली पालन के लिए आवश्यक सहायता मिली।

शासकीय सहयोग से मिले संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए दुर्गा ने धीरे-धीरे अपनी आजीविका के कई साधन विकसित किए। उन्होंने सुअर पालन के साथ मुर्गी, बकरी और मछली पालन को भी अपनाया। अलग-अलग गतिविधियों से होने वाली आय ने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज पशुपालन और मछली पालन उनके लिए केवल आमदनी का जरिया नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भरता और सम्मान का माध्यम भी बन गया है।

अपनी मेहनत से अर्जित आय का उपयोग दुर्गा परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के साथ बच्चों की पढ़ाई में भी कर रही हैं। आर्थिक आत्मनिर्भरता ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया है और परिवार के भविष्य को बेहतर बनाने की राह खोली है। ग्रामीण क्षेत्र में रहते हुए विभिन्न आजीविका गतिविधियों को एक साथ अपनाकर उन्होंने यह साबित किया है कि उचित मार्गदर्शन, संसाधन और मेहनत के जरिए महिलाएं अपनी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव ला सकती हैं।

दुर्गा नट का कहना है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिलाओं के लिए संचालित योजनाओं से उन्हें काफी लाभ मिला है। उन्हें महतारी वंदन योजना का भी लाभ मिल रहा है। उनका मानना है कि शासन की योजनाओं और मिले सहयोग की वजह से उन्हें अपनी आजीविका बढ़ाने का अवसर मिला और वे लखपति दीदी बनने में सफल हुईं। आर्थिक रूप से मजबूत होने के बाद समाज और रिश्तेदारों के बीच उनके सम्मान में भी बढ़ोतरी हुई है।

दुर्गा नट की मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से ‘दीदी के गोठ’ कार्यक्रम की वर्षगांठ के अवसर पर बातचीत भी हुई थी। इस दौरान उन्होंने अपनी आजीविका और जीवन में आए बदलाव की जानकारी साझा की थी। मुख्यमंत्री से अपनी सफलता की कहानी साझा करना उनके लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाला अनुभव रहा।

दुर्गा नट की कहानी ग्रामीण महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण है। पशुपालन और मछली पालन जैसी स्थानीय आजीविका गतिविधियों के जरिए उन्होंने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके अनुभव से यह भी सामने आता है कि महिलाओं को योजनाओं के माध्यम से संसाधन और अवसर मिलने पर वे परिवार के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।