औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने छिंदवाड़ा के कृषकों ने किया जिले का प्रतिनिधित्व
छिंदवाड़ा जिले में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने की दिशा में किसानों और उत्पादकों की भागीदारी सामने आई है। कार्यक्रम में वीरन लाल यादव, रामकिशन धुर्वे, सुंदरलाल नागवंशी, रघुवीर पहाड़े और दिलीप बिंझाड़े ने जिले का प्रतिनिधित्व किया। किसानों को बाजार उपलब्ध कराने और उनकी उपज की मार्केटिंग में वसुंधरा जैविक खाद एवं सब्जी अनुसंधान समिति नोडल एजेंसी के रूप में सुविधा उपलब्ध कराएगी।
UNITED NEWS OF ASIA, वीरेंद्र यादव, छिंदवाड़ा l जिले में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम में छिंदवाड़ा जिले का प्रतिनिधित्व औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने वाले कृषकों एवं उत्पादकों ने किया।
कार्यक्रम में वीरन लाल यादव, रामकिशन धुर्वे, सुंदरलाल नागवंशी, रघुवीर पहाड़े और दिलीप बिंझाड़े ने छिंदवाड़ा जिले की ओर से सहभागिता की। किसानों ने औषधीय पौधों की खेती, उत्पादन और इससे जुड़ी संभावनाओं को लेकर अपनी भागीदारी दर्ज कराई।
औषधीय पौधों की खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आय का बेहतर माध्यम बन सकती है। इसके लिए उत्पादन के साथ-साथ किसानों को उनकी उपज का उचित बाजार उपलब्ध कराना भी जरूरी है। इसी दिशा में छिंदवाड़ा जिले में वसुंधरा जैविक खाद एवं सब्जी अनुसंधान समिति को नोडल एजेंसी के रूप में मार्केटिंग कार्य की जिम्मेदारी देने की पहल की गई है।
नोडल एजेंसी के माध्यम से किसानों को औषधीय पौधों और अन्य कृषि उत्पादों की मार्केटिंग में सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। इससे किसानों को अपनी उपज के लिए बाजार तलाशने में मदद मिलेगी और उत्पादों को बेहतर तरीके से बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित हो सकेगी।
कार्यक्रम में किसानों की भागीदारी से यह संदेश भी सामने आया कि पारंपरिक खेती के साथ औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देकर कृषि क्षेत्र में नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। यदि किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री और बेहतर बाजार उपलब्ध हो, तो औषधीय खेती को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया जा सकता है।
छिंदवाड़ा जिले में नोडल एजेंसी के रूप में वसुंधरा जैविक खाद एवं सब्जी अनुसंधान समिति की भूमिका किसानों को उत्पादन से लेकर मार्केटिंग तक सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे जिले के किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए प्रोत्साहन मिलने के साथ उनकी कृषि उपज को बाजार से जोड़ने में भी मदद मिलेगी।
कार्यक्रम में शामिल किसानों ने औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने, किसानों को बाजार से जोड़ने और कृषि आधारित आय के नए अवसर विकसित करने पर जोर दिया।