प्रस्तावित व्यवस्था के तहत किशोरों के लिए Facebook और Instagram को मिलाकर रोजाना दो घंटे की डिफॉल्ट इस्तेमाल सीमा तय की जा सकती है। इस सीमा को हटाने या बढ़ाने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी होगी। दोनों प्लेटफॉर्म पर बिताया गया समय इसी साझा सीमा में शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों और किशोरों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को सीमित करना और उन्हें लंबे समय तक ऐप्स पर सक्रिय रहने से रोकना है।
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव रात के समय इस्तेमाल को लेकर बताया जा रहा है। प्रस्तावित नियमों के मुताबिक 18 साल से कम उम्र के यूजर्स रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक Facebook और Instagram का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक दोनों प्लेटफॉर्म पर नोटिफिकेशन डिफॉल्ट रूप से म्यूट रखने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इससे स्कूल और पढ़ाई के समय सोशल मीडिया से आने वाले व्यवधान को कम करने की कोशिश की जाएगी।
Meta की ओर से उम्र की जांच के लिए ज्यादा सख्त तकनीक लागू करने और पैरेंटल कंट्रोल को आसान बनाने की भी योजना बताई गई है। इसके साथ ही बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट से बचाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, इन बदलावों का दायरा और इन्हें लागू करने की प्रक्रिया समझौते तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया के अनुसार तय होगी।
यह पूरा मामला अमेरिका में Meta के खिलाफ दायर मुकदमों से जुड़ा है। कई अमेरिकी राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने 2023 में कंपनी पर आरोप लगाया था कि Facebook और Instagram में ऐसे फीचर मौजूद हैं, जो बच्चों और किशोरों को प्लेटफॉर्म पर अधिक समय बिताने के लिए प्रेरित करते हैं। आरोपों में यह भी कहा गया था कि सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। Meta ने इन आरोपों से इनकार किया है और समझौते में किसी गलती या कानूनी जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं किया है।
समझौते के तहत राज्यों को मिलने वाली रकम को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल के मुताबिक राज्यों को 17 अरब डॉलर तक मिल सकते हैं, जबकि Meta ने अपने बयान में कुल भुगतान करीब 18 अरब डॉलर बताया है। रिपोर्टों के अनुसार समझौते की कुछ रकम निश्चित है, जबकि अतिरिक्त राशि कुछ शर्तों पर निर्भर करेगी। Meta ने 2026 की तीसरी तिमाही में करीब 10 अरब डॉलर का कानूनी खर्च दर्ज करने की बात भी कही है।
Meta का कहना है कि किशोरों के लिए सुरक्षित ऑनलाइन अनुभव उसकी प्राथमिकता है। कंपनी के अनुसार समझौते की प्रभावशीलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि अन्य बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों की सुरक्षा के लिए इसी तरह के कदम उठाते हैं या नहीं।
भारत की बात करें तो अमेरिका में हुआ यह समझौता भारतीय यूजर्स पर सीधे तौर पर लागू नहीं होगा। हालांकि, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, उम्र की पुष्टि, स्क्रीन टाइम और पैरेंटल कंट्रोल जैसे मुद्दों पर दुनियाभर में टेक कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है। भारत में भी बच्चों के डेटा और ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े नियमों को लेकर लगातार चर्चा और नियामकीय गतिविधियां जारी हैं।