मोरवा वार्ड-10 की राशन दुकान महीनेभर बंद, हितग्राही परेशान
सिंगरौली जिले के मोरवा वार्ड-10 में शासकीय राशन दुकान एक महीने से बंद रहने के कारण हितग्राहियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने सेल्समैन पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. आदर्श तिवारी। मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के मोरवा वार्ड क्रमांक 10 में शासकीय उचित मूल्य (राशन) दुकान की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। यहां 1 मार्च से 30 मार्च 2026 तक दुकान पर लगातार ताला लटका रहा, जिससे क्षेत्र के सैकड़ों हितग्राहियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
सोमवार को भी सुबह से बड़ी संख्या में ग्रामीण राशन लेने के लिए दुकान के बाहर पहुंच गए, लेकिन दोपहर 2 बजे तक दुकान नहीं खुली। तेज धूप में महिलाएं, बुजुर्ग और दिव्यांगजन घंटों लाइन में खड़े होकर इंतजार करते रहे। कई लोगों ने अपनी जगह सुरक्षित रखने के लिए बोरी और अन्य सामान रख दिया और कुछ समय के लिए घर लौट गए, इस उम्मीद में कि शायद दुकान खुल जाए।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि दुकान के सेल्समैन सुरेंद्र प्रताप सिंह अपनी जिम्मेदारियों के प्रति पूरी तरह लापरवाह हैं। ग्रामीणों के अनुसार, वे न तो समय पर दुकान खोलते हैं और न ही फोन कॉल का जवाब देते हैं। उनका कहना है कि जब से उन्होंने कार्यभार संभाला है, तब से राशन वितरण व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि पहले के सेल्समैन के समय में दुकान नियमित रूप से खुलती थी और वितरण व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित होती थी। लेकिन वर्तमान स्थिति में गरीब और जरूरतमंद लोगों को अपने हक के राशन के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।
इस लापरवाही का सबसे अधिक असर उन परिवारों पर पड़ रहा है जो पूरी तरह से सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर निर्भर हैं। राशन नहीं मिलने से उनके सामने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो गया है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लिया जाए और संबंधित सेल्समैन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि उचित मूल्य दुकान समय पर खुले और राशन वितरण व्यवस्था को व्यवस्थित किया जाए, ताकि हितग्राहियों को समय पर खाद्यान्न मिल सके।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो वे सामूहिक रूप से विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। उनका मानना है कि यह केवल एक दुकान का मामला नहीं है, बल्कि गरीबों के अधिकार और जीवनयापन से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
प्रशासन के लिए यह एक महत्वपूर्ण चेतावनी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है। जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा मौके पर जांच कर तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोगों का विश्वास व्यवस्था पर बना रहे और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित न होना पड़े।