उद्यानिकी महाविद्यालय स्थानांतरण पर बवाल: बदरौडी-देवगवां के ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में प्रस्तावित उद्यानिकी महाविद्यालय के स्थानांतरण को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ गया है। बदरौडी-देवगवां के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर निर्णय बदलने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

Mar 30, 2026 - 17:45
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उद्यानिकी महाविद्यालय स्थानांतरण पर बवाल: बदरौडी-देवगवां के ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

UNITED NEWS OF ASIA. छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में प्रस्तावित शासकीय उद्यानिकी महाविद्यालय को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। बदरौडी-देवगवां सहित आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों ने महाविद्यालय के संभावित स्थानांतरण के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के नाम विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि महाविद्यालय को यहां से हटाया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

ग्रामीणों के अनुसार, लगभग तीन वर्ष पहले छत्तीसगढ़ शासन ने मरवाही क्षेत्र में उद्यानिकी महाविद्यालय खोलने की स्वीकृति दी थी। इस परियोजना के लिए करीब 100 एकड़ भूमि की आवश्यकता तय की गई थी। इसके बाद राजस्व विभाग द्वारा ग्राम पंचायत बदरौडी के आश्रित ग्राम देवगवां में लगभग 80 एकड़ उपयुक्त भूमि का चयन किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थल सभी आवश्यक मानकों पर खरा उतरता है और महाविद्यालय स्थापना के लिए आदर्श स्थान है।

बदरौडी-देवगवां का यह क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से विकासखंड मरवाही के केंद्र में स्थित है। यहां सड़क, पानी और पहुंच मार्ग जैसी बुनियादी सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यहां महाविद्यालय बनने से आसपास के आधे से अधिक गांवों के विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा और शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आएगा।

इसके अलावा, छात्र-छात्राओं के लिए छात्रावास निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि शासन स्तर पर इस स्थान को अंतिम रूप दिया जा चुका था। ऐसे में अब अचानक स्थान परिवर्तन की चर्चा ने ग्रामीणों में असंतोष पैदा कर दिया है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कुछ प्रभावशाली लोग अपने निजी स्वार्थों के कारण महाविद्यालय को मरवाही स्थानांतरित कराने का दबाव बना रहे हैं। उनका कहना है कि मरवाही में पर्याप्त राजस्व भूमि उपलब्ध नहीं है और वह स्थल वर्तमान प्रस्तावित स्थान की तुलना में कम उपयुक्त है। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर निर्णय बदलने की कोशिशें हो रही हैं, जिसे ग्रामीणों ने जनविरोधी करार दिया है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रशासन पहले कई बार इस स्थल को उपयुक्त बता चुका है, लेकिन अब दबाव में आकर फैसले को बदलने का प्रयास किया जा रहा है। इससे न केवल हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा, बल्कि क्षेत्र के विकास पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।

ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और महाविद्यालय को बदरौडी-देवगवां में ही स्थापित करने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

इस मुद्दे ने जिले में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज कर दी है। जनप्रतिनिधियों से लेकर आम नागरिकों तक सभी की नजर अब शासन के फैसले पर टिकी हुई है। यदि समय रहते संतुलित और जनहित में निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में यह मामला बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।