धमतरी में पॉक्सो केस में बड़ा फैसला: आरोपी पंकज निषाद को 20 साल की सश्रम कैद

धमतरी के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में दर्ज पॉक्सो एक्ट मामले में न्यायालय ने आरोपी पंकज निषाद को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। मजबूत साक्ष्य और पुलिस की प्रभावी विवेचना के चलते यह निर्णय संभव हुआ।

Mar 30, 2026 - 17:15
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धमतरी में पॉक्सो केस में बड़ा फैसला: आरोपी पंकज निषाद को 20 साल की सश्रम कैद

UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी। जिले में महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े एक गंभीर मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को कड़ी सजा सुनाई है। सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में दर्ज पॉक्सो एक्ट के प्रकरण में आरोपी पंकज कुमार निषाद को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 3000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है। इस फैसले को धमतरी पुलिस की सशक्त विवेचना और प्रभावी पैरवी का परिणाम माना जा रहा है।

यह मामला अपराध क्रमांक 491/24 के तहत दर्ज किया गया था, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शुरुआत से ही इसे प्राथमिकता में रखा और जांच को बेहद गंभीरता से आगे बढ़ाया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, विवेचना के दौरान सभी साक्ष्यों का वैज्ञानिक तरीके से संकलन किया गया। गवाहों के बयान, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को मजबूती से संकलित कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इसी सुदृढ़ आधार के चलते न्यायालय ने आरोपी को दोषसिद्ध पाते हुए कड़ा निर्णय सुनाया।

इस पूरे प्रकरण में थाना प्रभारी सिटी कोतवाली निरीक्षक राजेश मरई और तत्कालीन विवेचना अधिकारी उप निरीक्षक महेंद्र साहू की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही। दोनों अधिकारियों ने पेशेवर दक्षता और संवेदनशीलता के साथ मामले की जांच की, जिससे पीड़ित पक्ष को न्याय मिल सका।

धमतरी पुलिस अधीक्षक ने इस उत्कृष्ट कार्य के लिए विवेचना अधिकारी को नगद पुरस्कार देकर सम्मानित करने की घोषणा की है। उनका कहना है कि इस तरह के मामलों में प्रभावी जांच और मजबूत पैरवी से ही दोषियों को सजा दिलाई जा सकती है, जिससे समाज में कानून के प्रति विश्वास मजबूत होता है।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि महिला एवं बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जा रही है। ऐसे अपराधों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस फैसले के बाद जिले में एक सकारात्मक संदेश गया है कि कानून के हाथ लंबे हैं और अपराध करने वालों को अंततः सजा मिलती ही है। साथ ही, यह मामला अन्य पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना है कि यदि जांच सही दिशा में और पूरी निष्ठा से की जाए, तो न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है।

कुल मिलाकर, यह फैसला न केवल पीड़ित को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में सुरक्षा और विश्वास का माहौल बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है।