कंजिया धान खरीदी केंद्र में बड़ा खेल: 40 की जगह 41 किलो तौल, किसानों से खुलेआम लूट!
एमसीबी जिले के कंजिया धान खरीदी केंद्र में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। 40 किलो की तय भर्ती के बजाय 41 किलो से अधिक तौल कर किसानों से अतिरिक्त धान लिया जा रहा है। हमाली व्यवस्था न होने से महिला किसानों को बोरी उठाने तक को मजबूर होना पड़ रहा है।
UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र शुक्ला, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB)। एक ओर छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के हित में योजनाओं और समर्थन मूल्य की बातें कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट नजर आ रही है। एमसीबी जिले के कंजिया धान खरीदी केंद्र से भ्रष्टाचार और बदइंतजामी की चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां नियमों को ताक पर रखकर किसानों का खुला शोषण किया जा रहा है।
प्रति बोरी 1 किलो की कटौती
नियमों के अनुसार धान की एक बोरी (भर्ती) का निर्धारित वजन 40 किलोग्राम है। लेकिन मीडिया टीम द्वारा किए गए औचक निरीक्षण में केंद्र का कांटा 41 किलोग्राम से अधिक वजन दिखाता पाया गया। प्रति बोरी 1 किलो से ज्यादा की यह अतिरिक्त कटौती किसानों की मेहनत की फसल पर सीधा डाका है। सवाल यह है कि हजारों बोरियों से निकला यह अतिरिक्त धान आखिर जा कहां रहा है?
महिला किसान बोरी उठाने को मजबूर
केंद्र पर केवल तौल में ही नहीं, बल्कि व्यवस्थाओं में भी भारी अव्यवस्था देखने को मिली।
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समिति द्वारा हमाली (मजदूरी) की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
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किसान खुद ही धान की पलटी और तौल करने को मजबूर हैं।
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हमाली न होने से महिला किसानों को भी भारी बोरियां उठानी पड़ रही हैं।
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समिति प्रबंधक और जिम्मेदार अधिकारी या तो मौके से नदारद हैं या मूकदर्शक बने हुए हैं।
किसके संरक्षण में चल रहा खेल?
इस पूरे मामले ने प्रशासन और सहकारी समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—
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तय वजन से अधिक धान लेने की अनुमति किसने दी?
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क्या यह गड़बड़ी उच्च अधिकारियों की जानकारी या संरक्षण में चल रही है?
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किसानों से जबरन हमाली का काम कराना क्या नियमों का खुला उल्लंघन नहीं है?
आक्रोशित किसान, जांच की मांग
स्थानीय किसानों में इस धांधली को लेकर भारी आक्रोश है। किसानों का कहना है कि वे मौसम की मार झेलकर फसल उगाते हैं, लेकिन खरीदी केंद्रों पर उन्हें लूट और भर्राशाही का सामना करना पड़ रहा है।
अब देखना यह होगा कि एमसीबी जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में दोषी प्रबंधक और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करता है या फिर किसानों की यह आवाज भी फाइलों में दबकर रह जाएगी।