मां और खिलाड़ी दोनों की मिसाल: असम की पल्लवी पायेंग ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में जीता रजत पदक
असम की वेटलिफ्टर पल्लवी पायेंग ने मातृत्व और खेल के बीच संतुलन बनाते हुए खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में रजत पदक जीता। बेटी को पीछे छोड़कर दोबारा ट्रेनिंग शुरू करने का उनका फैसला और परिवार का सहयोग उनकी सफलता की प्रेरक कहानी बन गया है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर। खेल और जिंदगी के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता, खासकर तब जब जिम्मेदारी एक मां की भी हो। असम की वेटलिफ्टर पल्लवी पायेंग ने इस चुनौती को न केवल स्वीकार किया, बल्कि उसे अपनी ताकत बनाकर खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में रजत पदक जीतकर एक मिसाल पेश की है।
मिसिंग जनजाति से ताल्लुक रखने वाली पल्लवी पायेंग की कहानी संघर्ष, त्याग और दृढ़ संकल्प की प्रेरणादायक गाथा है। जब उनकी बेटी महज छह महीने की थी, तब उनके सामने एक कठिन निर्णय था—या तो वे अपने खेल करियर को छोड़ दें या फिर अपनी बेटी से दूर रहकर दोबारा ट्रेनिंग शुरू करें। यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन पल्लवी ने अपने सपनों को चुनते हुए वेटलिफ्टिंग में वापसी का रास्ता अपनाया।
इस मुश्किल दौर में उनके पति सुखावन थौमंग ने उनका पूरा साथ दिया। सीमा सुरक्षा बल (BSF) में कार्यरत उनके पति ने उन्हें लगातार प्रोत्साहित किया, जबकि उनकी मां ने बेटी की देखभाल की जिम्मेदारी संभाली। परिवार के इस सहयोग ने पल्लवी को अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहने की ताकत दी।
पल्लवी ने 2018 में वेटलिफ्टिंग की शुरुआत की थी और राज्य स्तर पर अपनी पहचान बनाई थी। हालांकि, कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के कारण उनका खेल करियर प्रभावित हुआ। इसी दौरान वे मां बनीं, लेकिन खेल में वापसी की इच्छा उनके अंदर जीवित रही।
मां बनने के बाद खेल में लौटना उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने खुद स्वीकार किया कि शारीरिक फिटनेस हासिल करना और मानसिक रूप से मजबूत बने रहना आसान नहीं था। 2023 में गोलाघाट में आयोजित राज्य चैंपियनशिप में वे छठे स्थान पर रहीं, जबकि 2024 में डिब्रूगढ़ में भी उन्हें निराशा हाथ लगी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करती रहीं।
उनकी मेहनत 2025 में रंग लाई, जब उन्होंने तेजपुर में आयोजित राज्य चैंपियनशिप में रजत पदक जीता और अस्मिता लीग में स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके बाद एक और स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपनी वापसी को और मजबूत किया।
रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में महिलाओं के 69 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतना उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। इस उपलब्धि ने उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है और यह साबित किया है कि वे राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी बनने की पूरी क्षमता रखती हैं।
आज पल्लवी की चार साल की बेटी उनके जीवन का सबसे बड़ा सहारा है, भले ही वह अपनी मां के साथ हमेशा न रह पाती हो। पल्लवी का यह सफर हर उस महिला के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अगर इरादे मजबूत हों और परिवार का साथ मिले, तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।