कोरिया वन मंडल में भ्रष्टाचार: श्रमिकों की मजदूरी पर डाका, डिप्टी रेंजर पर दलाली के आरोप

छत्तीसगढ़ के कोरिया वन मंडल में भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं, जहां वन श्रमिकों की मेहनत की मजदूरी में हेरफेर हो रहा है। डिप्टी रेंजर मंगल साय पर दलाली और श्रमिकों के हक के पैसों की बंदरबांट करने का आरोप है, लेकिन उच्च अधिकारियों और वन मंत्री के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।

Jan 3, 2026 - 16:46
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कोरिया वन मंडल में भ्रष्टाचार: श्रमिकों की मजदूरी पर डाका, डिप्टी रेंजर पर दलाली के आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. प्रदीप पाटकर, कोरिया | वन मंडल में भ्रष्टाचार का खुलासा: श्रमिकों की मजदूरी पर 'डाका'

छत्तीसगढ़ के कोरिया वन मंडल से एक शर्मनाक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां वन श्रमिकों की मेहनत की मजदूरी में हेरफेर किया जा रहा है। इन श्रमिकों का मुख्य कार्य वनों की रक्षा करना और पौधरोपण में योगदान देना है, लेकिन इनकी मेहनत के बदले इनको उचित भुगतान नहीं किया जा रहा। आरोप है कि विभाग के जिम्मेदार कर्मचारी और अधिकारी, खासकर डिप्टी रेंजर मंगल साय, इन मजदूरी के पैसों में दलाली कर रहे हैं।

डिप्टी रेंजर मंगल साय पर आरोप है कि वह श्रमिकों की मजदूरी भुगतान में एक दलाल की तरह काम कर रहे हैं। इसके अलावा, उन्हें पहले भी मजदूरी के भुगतान में हेरफेर करने और पैसों की बंदरबांट करने के आरोप लग चुके हैं, लेकिन उनकी ऊंची पहुंच और विभागीय रसूख के चलते अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई। श्रमिकों का कहना है कि उनके कई महीनों से लंबित भुगतान के कारण उनके घरों में चूल्हा जलाना भी मुश्किल हो गया है। इसके बावजूद, कोई भी अधिकारी या कर्मचारी उनकी मदद के लिए आगे नहीं आ रहा।

यह मामला तब और गंभीर हो जाता है जब यह पता चलता है कि यह भ्रष्टाचार विभाग के उच्च अधिकारियों तक पहुंच चुका है और यहां तक कि छत्तीसगढ़ के वन मंत्री तक इसकी जानकारी दी जा चुकी है। इसके बावजूद, भ्रष्ट कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच मिलीभगत के कारण इस मामले में कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो रही है।

वनों की रक्षा करने वाले श्रमिकों के हक का हरण एक गंभीर मामला है, और यह सीधे तौर पर उनके अधिकारों का उल्लंघन है। वन विभाग में हो रहे इस भ्रष्टाचार को रोकने के लिए उच्च अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि इन श्रमिकों को उनका हक मिल सके और विभाग में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

इस मामले में उच्च अधिकारियों की निष्क्रियता और रसूखदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई न होने के कारण श्रमिकों में आक्रोश और निराशा बढ़ती जा रही है। सरकार और विभाग को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि इस भ्रष्टाचार को समाप्त किया जा सके और श्रमिकों के हक की रक्षा हो सके।