नेपाल ने विदेशी रेस्क्यू पर लिया यू-टर्न, भीषण बाढ़ के बाद भारत समेत चार देशों से लेगा सीमित मदद

नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड से भारी तबाही के बाद सरकार ने विदेशी राहत और बचाव टीमों की सीमित मदद लेने की मंजूरी दे दी है। भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञों से टनल रेस्क्यू, डीएनए जांच, शवों की पहचान और चिकित्सा सेवाओं में सहयोग लिया जाएगा। नेपाल पुलिस के अनुसार बाढ़ में 579 लोगों की मौत हुई है, जबकि करीब 2500 लोग लापता या संपर्क से बाहर हैं।

Aug 29, 2026 - 11:03
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नेपाल ने विदेशी रेस्क्यू पर लिया यू-टर्न, भीषण बाढ़ के बाद भारत समेत चार देशों से लेगा सीमित मदद

UNITED NEWS OF ASIA. नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। बाढ़ के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की सूचना सामने आई है। संकट की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार ने विदेशी राहत और बचाव सहायता को लेकर अपने रुख में बदलाव किया है। अब नेपाल ने भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञों तथा सीमित खोज और बचाव टीमों की मदद लेने की अनुमति देने की बात कही है।

बाढ़ के बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि नेपाल सरकार ने विदेशी रेस्क्यू टीमों और राहत सहायता को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। हालांकि अब नेपाली सरकार ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि उसने अंतरराष्ट्रीय सहायता लेने से कभी पूरी तरह इनकार नहीं किया। सरकार का कहना है कि जिन क्षेत्रों में विशेष तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होगी, वहां विदेशी विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।

नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ के बाद सेना और स्थानीय बचाव दलों पर राहत एवं रेस्क्यू अभियान का दबाव काफी बढ़ गया है। प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में लोगों की तलाश, राहत पहुंचाने और बुनियादी सेवाओं को बहाल करने की चुनौती बनी हुई है। ऐसे में तकनीकी विशेषज्ञता वाली विदेशी टीमों की मदद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भारत की ओर से भी नेपाल को आवश्यक सहयोग देने की तैयारी की जा रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल के अनुसार, नेपाल के अनुरोध पर भारत टनल रेस्क्यू टीम भेजने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए पहले एक सर्वे टीम भेजी जाएगी, जो प्रभावित परिस्थितियों का आकलन करेगी और रेस्क्यू अभियान के लिए आवश्यक उपकरणों की जरूरत का पता लगाएगी।

विदेशी विशेषज्ञों को मुख्य रूप से टनल रेस्क्यू, डीएनए जांच और शवों की पहचान जैसे तकनीकी कार्यों में लगाया जा सकता है। इसके अलावा चिकित्सा सहायता के लिए भी टीमों की मदद लेने की तैयारी है। इस तरह विदेशी सहायता का फोकस राहत सामग्री भेजने के बजाय विशेष तकनीकी और मानवीय जरूरतों को पूरा करने पर रहेगा।

नेपाल पुलिस के अनुसार, बाढ़ में अब तक 579 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2500 लोग लापता या संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। इनमें 320 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने के कारण बचाव अभियान को तेजी से आगे बढ़ाना नेपाल के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

नेपाल सरकार ने संकेत दिया है कि मौजूदा कठिन परिस्थितियों में वह अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए तैयार है। खासकर उन मामलों में जहां स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और विशेषज्ञता से आगे की तकनीकी सहायता की जरूरत होगी, वहां विदेशी रेस्क्यू और विशेषज्ञ टीमों का सहयोग लिया जाएगा। इससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान को गति मिलने की उम्मीद है।