कश्मीरी पंडितों को फिर आतंकी धमकी, नाम और निजी जानकारी जारी करने से बढ़ी चिंता

कश्मीरी पंडितों को कथित तौर पर एक बार फिर धमकी भरा पत्र भेजे जाने का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार पत्र में कुछ कश्मीरी पंडितों के नाम और पते सहित निजी जानकारी दर्ज है तथा उन्हें कथित रूप से निशाना बनाने की धमकी दी गई है। अधिकारियों के स्तर पर पत्र की प्रामाणिकता और इसे भेजने वालों की पहचान की जांच की जा रही है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी ऐसी धमकियों को गंभीरता से लेने की बात कही है।

Aug 24, 2026 - 10:38
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कश्मीरी पंडितों को फिर आतंकी धमकी, नाम और निजी जानकारी जारी करने से बढ़ी चिंता

UNITED NEWS OF ASIA. कश्मीरी पंडितों को कथित तौर पर एक बार फिर आतंकी धमकी मिलने का मामला सामने आया है। सामने आई जानकारी के अनुसार एक धमकी भरे पत्र में कुछ कश्मीरी पंडितों के नाम और उनके पते सहित निजी जानकारी दर्ज की गई है। पत्र में उन्हें कथित तौर पर निशाना बनाते हुए उनकी गतिविधियों पर नजर रखने की बात कही गई है। इस मामले के सामने आने के बाद कश्मीरी पंडित समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक धमकी भरे पत्र में कई कश्मीरी पंडितों के नाम और उनके रहने के स्थान की जानकारी दी गई है। पत्र में उन्हें कथित तौर पर गद्दार और दिल्ली में बैठे लोगों के इशारे पर काम करने वाला बताया गया है। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। हालांकि, अधिकारियों की ओर से पत्र की प्रामाणिकता और इसे भेजने वाले व्यक्ति या संगठन की पहचान को लेकर जांच की जा रही है।

बताया जा रहा है कि पत्र पर अहमद बिलाल नाम से हस्ताक्षर किए गए हैं। रिपोर्ट में इसे यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल की ओर से जारी किए जाने का दावा किया गया है। इस संगठन को कुछ रिपोर्टों में लश्कर-ए-तैयबा के कथित मोर्चे के तौर पर बताया गया है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

धमकी में कश्मीरी पंडितों के उन वर्गों का भी उल्लेख किए जाने की बात सामने आई है, जो घाटी से बाहर चले गए हैं। पत्र में कथित तौर पर उन लोगों को अलग तरीके से चिन्हित किया गया है, जो कश्मीर में रह रहे हैं। साथ ही कश्मीर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े एजेंडे को आगे बढ़ाने का आरोप लगाते हुए कुछ लोगों को निशाना बनाने की कोशिश की गई है।

यह पहली बार नहीं है जब कश्मीरी पंडितों को इस तरह की धमकी मिलने की बात सामने आई है। इससे पहले सामने आए एक धमकी भरे पत्र में राजस्व विभाग में कार्यरत कुछ कर्मचारियों के नाम और टेलीफोन नंबर दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी। उस घटना के बाद संबंधित सरकारी विभागों ने कर्मचारियों को सतर्क रहने की सलाह दी थी और कुछ समय के लिए अवकाश भी दिया गया था।

घाटी में सुरक्षा को लेकर यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब कश्मीरी पंडितों और अन्य प्रवासी कर्मचारियों की सुरक्षा लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। इससे पहले कुलगाम में दो प्रवासी मजदूरों पर हमला कर उनकी हत्या किए जाने की घटना भी सामने आई थी। इन घटनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियों के सामने संवेदनशील इलाकों में काम कर रहे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती बनी हुई है।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी हाल में आतंकी धमकियों को हल्के में नहीं लेने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि यदि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद समाप्त होने का दावा किया जा रहा है तो इस तरह की धमकियां कहां से आ रही हैं। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था के लिए जिम्मेदार लोगों से इन धमकियों को गंभीरता से लेने की अपील की थी।

फिलहाल अधिकारियों द्वारा धमकी भरे पत्र की सत्यता, उसके स्रोत और इसके पीछे सक्रिय लोगों की पहचान को लेकर जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पत्र वास्तव में किस संगठन या व्यक्ति की ओर से भेजा गया था और इसमें दर्ज दावों की वास्तविकता क्या है।