घरेलू उपाय अपनाकर केमिकल मुक्त बागवानी करें: मनीषा त्रिवेदी

प्रकृति की ओर सोसायटी द्वारा आयोजित कलम आदान-प्रदान कार्यक्रम में प्रकृति प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में पौधों की देखभाल और कीट नियंत्रण के लिए रासायनिक कीटनाशकों के स्थान पर घरेलू एवं प्राकृतिक उपाय अपनाने की जानकारी दी गई। मनीषा त्रिवेदी ने मिर्च-लहसुन, नीम तेल और नीम की पत्तियों से तैयार प्राकृतिक घोल के उपयोग के साथ बगीचे से घोंघे हटाने के घरेलू उपाय बताए। संस्था ने पर्यावरण संरक्षण के लिए अपने अभियान को आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया।

Aug 24, 2026 - 13:59
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घरेलू उपाय अपनाकर केमिकल मुक्त बागवानी करें: मनीषा त्रिवेदी

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l प्रकृति की ओर सोसायटी द्वारा आयोजित कलम आदान-प्रदान कार्यक्रम अत्यधिक बारिश के बावजूद उत्साह और सफलता के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रकृति प्रेमियों ने हिस्सा लिया और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। आयोजन का उद्देश्य लोगों को पौधों के संरक्षण, प्राकृतिक बागवानी और पर्यावरण के प्रति जागरूक करना रहा।

संस्था के अध्यक्ष मोहन वर्ल्यानी ने कार्यक्रम में शामिल प्रकृति प्रेमियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सहयोग से पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियान को लगातार आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने उपस्थित लोगों को आने वाले समय में आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में भी सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का संचालन राम खटवानी ने किया।

कार्यक्रम की प्रभारी एवं प्रकृति प्रेमी मनीषा त्रिवेदी ने वर्षा ऋतु में पेड़-पौधों की देखभाल और उन्हें विभिन्न प्रकार के कीटों से सुरक्षित रखने के लिए प्राकृतिक एवं घरेलू उपायों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पौधों पर कीटों के प्रकोप से बचाव के लिए रासायनिक कीटनाशकों के बजाय घरेलू उपचारों को भी अपनाया जा सकता है। इससे बागवानी को अधिक प्राकृतिक और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकता है।

मनीषा त्रिवेदी ने बताया कि मिर्च और लहसुन का पेस्ट पानी में मिलाकर तैयार घोल का पौधों पर छिड़काव किया जा सकता है। इसी तरह नीम के तेल का छिड़काव भी कीट नियंत्रण में उपयोगी हो सकता है। नीम की पत्तियों को पीसकर पानी में मिलाकर तैयार किए गए घोल का पौधों पर छिड़काव करने से भी कीटों और संक्रमण से बचाव में मदद मिल सकती है।

उन्होंने बगीचे में घोंघों की समस्या से निपटने के लिए भी घरेलू उपाय बताया। उनके अनुसार रात के समय बगीचे में खीरे के टुकड़े रखने से घोंघे उनकी ओर आकर्षित हो सकते हैं। सुबह इन टुकड़ों को हटाकर घोंघों को बगीचे से बाहर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सरल घरेलू उपाय अपनाकर लोग अपने घरों और बगीचों में रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल को कम करते हुए प्राकृतिक तरीके से पौधों की देखभाल कर सकते हैं।

कार्यक्रम में मोहन वर्ल्यानी, मनीषा त्रिवेदी, राम खटवानी, सुधा केसरवानी, नूपुर परगनिया, प्रियंका सिन्हा, गुरमीत अरोरा, सुचिता चौधरी, श्यामली और कर्नल सुनील मिश्रा सहित प्रकृति प्रेमी एवं संस्था से जुड़े सदस्य उपस्थित रहे। बारिश के बावजूद कार्यक्रम में मिली सक्रिय भागीदारी ने पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक बागवानी के प्रति लोगों की रुचि को दर्शाया।